मुकेश प्रजापति,भैरूंदा: मध्य प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के तमाम दावों और करोड़ों के बजट की पोल खोलती एक बेहद विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। मामला हाई-प्रोफाइल और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रभाव वाले क्षेत्र भैरूंदा सिविल अस्पताल का है, जहां प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक असहाय गर्भवती महिला को अस्पताल प्रबंधन एक बेड तक नसीब नहीं करा सका। दर्द से कराहती प्रसूता ने आधी रात को अस्पताल के ठंडे फर्श पर लेटकर वक्त काटा। इस पूरी अमानवीय घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
आए थे अस्पताल, मिला फर्श का सहारा
यह दर्दनाक वाकया रविवार रात का बताया जा रहा है। पीड़ित परिवार के अनुसार, ग्राम खरसानिया निवासी नीरज अपनी गर्भवती पत्नी टीना को प्रसव के लिए उम्मीद के साथ भैरूंदा के मुख्य सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का गंभीर आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने संवेदनहीनता दिखाते हुए महिला को तुरंत बेड उपलब्ध नहीं कराया।
स्टाफ गायब, फिर किया रेफर
दर्द असहनीय होने के कारण प्रसूता अस्पताल के फर्श पर ही लेटने को मजबूर हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में न केवल फर्श पर तड़पती महिला दिख रही है, बल्कि ड्यूटी कक्ष और अस्पताल परिसर से जिम्मेदार डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ भी पूरी तरह नदारद नजर आ रहे हैं। बाद में आनन-फानन में गर्भवती महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला अस्पताल सीहोर रेफर कर दिया गया।
पूर्व सीएम ने संवारा था अस्पताल
इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। नगर बचाओ आंदोलन के बैनर तले नागरिकों ने सीधे प्रशासनिक मोर्चेबंदी करते हुए स्थानीय एसडीएम और सीएमएचओ को एक 5 सूत्रीय मांग पत्र और शिकायती आवेदन सौंपा।
मांग पत्र में साफ तौर पर लिखा गया है कि इस सिविल अस्पताल को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बेहद संवेदनशील पहल करते हुए सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक मशीनों, पर्याप्त दवाइयों व विशेष जच्चा-बच्चा वार्ड से सुसज्जित करवाया था। इसका मुख्य उद्देश्य यही था कि क्षेत्र के गरीब ग्रामीणों को इलाज के लिए भोपाल या इंदौर न भागना पड़े। लेकिन आज स्थानीय अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही और लापरवाह स्टाफ की अनियमितता के कारण पूरी व्यवस्था 'भगवान भरोसे' चल रही है।
वो सुलगते 5 सवाल
जब अस्पताल में पर्याप्त बेड और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो गर्भवती महिला को फर्श पर लेटने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा? रात के समय ड्यूटी रोस्टर के अनुसार तैनात डॉक्टर, नर्स और अन्य जिम्मेदार स्टाफ अपने केबिन से क्यों नदारद रहते हैं? क्या ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीजों के लिए भैरूंदा सिविल अस्पताल सिर्फ एक 'रेफरल सेंटर' बनकर रह गया है? आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त बनाने के बावजूद अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड की बदहाली का असली जिम्मेदार कौन है? लापरवाही के इस गंदे ढर्रे पर लगाम कसने में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी अब तक नाकाम क्यों रहे?
स्वास्थ्य विभाग का बयान, होगी कार्रवाई
वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने और स्थानीय स्तर पर मचे भारी बवाल के बाद स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी बैकफुट पर आ गए हैं। जिले के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों ने वीडियो पर संज्ञान लेने की पुष्टि करते हुए कहा कि रविवार रात की शिफ्ट में किस-किस कर्मचारी और डॉक्टर की तैनाती थी, उनकी सूची और हाजिरी रजिस्टर खंगाला जा रहा है। विभागीय जांच रिपोर्ट आते ही लापरवाही बरतने वाले और ड्यूटी से गायब रहने वाले दोषियों के खिलाफ दंडात्मक और निलंबन की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।