बलौदा बाजार। दृढ़ संकल्प और हौसले के दम पर मुश्किल से मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के ग्राम जारा निवासी सौरभ देवांगन ने अपनी पांच साल की पैदल भारत यात्रा पूरी कर इस बात को साबित किया है। 7 अक्टूबर 2021 को रायपुर के मरीन ड्राइव से शुरू हुआ उनका सफर देश के 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंचा। पांच साल बाद अपने गांव लौटने पर सौरभ का ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों, डीजे और भव्य जुलूस के साथ जोरदार स्वागत किया। उनकी इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी उन्हें बधाई दी।
कोरोना काल में लिया पूरे भारत को पैदल घूमने का संकल्प
सौरभ देवांगन ने वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के दौर में पूरे देश की पैदल यात्रा करने का सपना देखा था। इस संकल्प को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने करीब तीन महीने तक तैयारी की। यात्रा के रास्तों, संभावित परेशानियों और जरूरी व्यवस्थाओं पर विचार करने के बाद उन्होंने अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाने का फैसला किया। शुरुआत में सौरभ के माता-पिता उनके इस निर्णय को लेकर चिंतित थे। पांच साल तक घर से दूर रहकर देश भ्रमण करना आसान नहीं था। हालांकि, बेटे के जुनून और दृढ़ इच्छाशक्ति को समझने के बाद परिवार ने उन्हें यात्रा पर जाने की अनुमति दे दी।
रायपुर के मरीन ड्राइव से शुरू हुआ पांच साल का सफर
सौरभ ने 7 अक्टूबर 2021 को रायपुर के मरीन ड्राइव से अपनी पैदल यात्रा की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग राज्यों, शहरों और क्षेत्रों से गुजरते हुए अपना सफर जारी रखा। इस दौरान उन्होंने भारत के 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों का भ्रमण किया। लंबे समय तक पैदल चलना, अनजान रास्तों पर आगे बढ़ना और अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करना उनके लिए बड़ी चुनौती रही होगी। इसके बावजूद सौरभ अपने लक्ष्य पर डटे रहे। पांच वर्षों तक जारी रहे इस अभियान ने उन्हें देश की विविध संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को करीब से देखने का अवसर दिया।
घर लौटते ही जश्न में डूबा गांव, 6 किलोमीटर दूर पहुंचे ग्रामीण
सौरभ की घर वापसी की खबर मिलते ही ग्राम जारा में उत्साह का माहौल बन गया। परिवार के सदस्यों, दोस्तों और ग्रामीणों को उस पल का लंबे समय से इंतजार था। अपने गांव के इस युवा की अगवानी के लिए लोग करीब छह किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे तक पहुंच गए। सौरभ के पहुंचने पर ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन के बीच उनका स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने उन्हें कंधों पर उठाया और जुलूस के रूप में गांव तक लेकर पहुंचे। पांच साल बाद अपने लोगों के बीच लौटे सौरभ के लिए यह पल बेहद खास रहा। उनकी वापसी केवल एक यात्री का घर लौटना नहीं, बल्कि वर्षों तक निभाए गए संकल्प की सफलता का उत्सव बन गई। गांव के लोगों ने अपने इस लाडले की उपलब्धि पर खुशी जाहिर की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी दी बधाई
पांच साल तक पैदल भारत भ्रमण करने के बाद सौरभ देवांगन की उपलब्धि की चर्चा उनके गांव और आसपास के क्षेत्रों में होने लगी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी सौरभ से मुलाकात कर उनका स्वागत किया और इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। सौरभ की यात्रा ने स्थानीय स्तर पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो किसी बड़े लक्ष्य को पूरा करने का सपना देखते हैं और उसके लिए लगातार मेहनत करने को तैयार रहते हैं।
बेटे की वापसी पर भावुक हुए माता-पिता
सौरभ की पांच साल लंबी यात्रा के दौरान उनके माता-पिता को उनकी सुरक्षा की चिंता बनी रही। घर से इतनी लंबी अवधि तक दूर रहने के बाद बेटे को सुरक्षित वापस देखकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सौरभ के पिता ने भावुक होकर कहा कि वे स्वयं तीर्थयात्रा पर नहीं जा सके थे, लेकिन बेटे की लंबी यात्रा और उसकी सकुशल वापसी देखकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ, मानो उनका बेटा तीर्थयात्रा करके लौटा हो और वे भी उसके साथ इस पुण्य यात्रा के सहभागी बन गए हों। परिवार के लिए यह मिलन भावनाओं से भरा पल था। पांच साल के इंतजार के बाद बेटे को सामने देखकर उनकी खुशी और गर्व साफ झलक रहा था।
दोस्तों ने भी बताया सौरभ के जुनून को प्रेरणादायक
सौरभ के दोस्तों का कहना है कि बड़े सपने देखना आसान है, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बीच अपने लक्ष्य पर टिके रहना हर किसी के लिए संभव नहीं होता। सौरभ ने अपनी इच्छाशक्ति और धैर्य के सहारे यात्रा जारी रखी। दोस्त भले ही पूरे सफर में उनके साथ नहीं चल पाए, लेकिन समय-समय पर उन्होंने उनका हौसला बढ़ाया और सहयोग किया। सौरभ की वापसी उनके मित्रों के लिए भी गर्व का अवसर बन गई।
पांच साल की यात्रा का सबसे खूबसूरत पड़ाव बना घर लौटना
7 अक्टूबर 2021 को शुरू हुई सौरभ देवांगन की पैदल भारत यात्रा पांच साल बाद अक्टूबर में अपने मुकाम तक पहुंची। इस लंबे सफर में उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों को देखा और कई तरह की परिस्थितियों का सामना किया। हालांकि, इस पूरी यात्रा का सबसे भावुक क्षण अपने गांव लौटना रहा। एक तरफ माता-पिता की आंखों में खुशी थी, तो दूसरी तरफ दोस्तों और ग्रामीणों के चेहरों पर गर्व दिखाई दे रहा था। सौरभ की कहानी इस बात का संदेश देती है कि बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल सपना देखना पर्याप्त नहीं है। उसके लिए धैर्य, निरंतर प्रयास और अपने संकल्प पर विश्वास बनाए रखना भी जरूरी है। पांच साल तक पैदल भारत भ्रमण करने के बाद अपनों के बीच लौटना सौरभ के लिए उनकी लंबी यात्रा का सबसे यादगार पड़ाव बन गया।