रायपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। साइबर अपराधों की निगरानी, जांच और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए स्टेट साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (S4C) का गठन किया गया है। इसके साथ ही साइबर अपराध से जुड़े मामलों में राज्य स्तर पर सिंगल प्वाइंट ऑफ कॉन्टैक्ट (SPOC) की व्यवस्था भी की गई है। गृह विभाग की ओर से 17 अगस्त 2026 को जारी आदेश के मुताबिक S4C, पुलिस मुख्यालय (PHQ) की तकनीकी सेवाएं शाखा के अधीन काम करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में साइबर अपराधों की प्रभावी निगरानी, संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय तथा साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करना है।
दो वरिष्ठ IPS अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
S4C के संचालन के लिए सरकार ने दो वरिष्ठ IPS अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। प्रशांत कुमार अग्रवाल (IPS 2008) को पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस मुख्यालय छत्तीसगढ़ के वर्तमान पद से पुलिस महानिरीक्षक, S4C, PHQ की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह गिरिजा शंकर जायसवाल (IPS 2010), जो वर्तमान में उप पुलिस महानिरीक्षक (तकनीकी सेवा), पुलिस मुख्यालय छत्तीसगढ़ के पद पर कार्यरत हैं, उन्हें उप पुलिस महानिरीक्षक, S4C, PHQ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
क्या करेगा S4C?
S4C के जरिए राज्य में साइबर अपराध से संबंधित गतिविधियों की निगरानी को केंद्रीकृत करने की कोशिश की गई है। इससे विभिन्न जांच एजेंसियों और पुलिस इकाइयों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा कार्रवाई में बेहतर तालमेल की उम्मीद है। साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच S4C को राज्य की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।