छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे एक बड़े ठगी रैकेट का खुलासा हुआ है। पुलिस कमिश्नरेट सेंट्रल जोन अंतर्गत सिविल लाइंस थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने पोस्ट ऑफिस में नौकरी लगवाने का झांसा देकर 52 बेरोजगार युवक-युवतियों से करीब 2.34 करोड़ रुपए की ठगी की।
फर्जी कंपनियों के जरिए चल रहा था ठगी का खेल
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने माइक्रो फाइनेंस के नाम से दो फर्जी कंपनियां रजिस्टर कराईं थीं। इन कंपनियों के नाम पर रायपुर के अंबुजा मॉल के सामने एश्वर्या बाजार में किराए पर ऑफिस लिया गया था, जहां से ठगी की पूरी गतिविधि संचालित हो रही थी। चारों आरोपी पंडरी थाना क्षेत्र में किराए के मकान में रह रहे थे।
खुद को बताता था पोस्ट ऑफिस का डायरेक्टर
इस ठगी रैकेट का मास्टरमाइंड नरेश मनहरे है, जो मूल रूप से जांजगीर-चांपा का निवासी है। वह खुद को दिल्ली पोस्ट ऑफिस का डायरेक्टर बताकर लोगों का भरोसा जीतता था और उन्हें पोस्ट ऑफिस के फर्जी नियुक्ति पत्र भेजता था।
फर्जी MBBS डिग्री भी मिली
पुलिस ने नरेश के लैपटॉप और मोबाइल की जांच की, जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी और डीपीयू डॉ. डीवाई पाटिल विद्यापीठ के नाम से जारी फर्जी MBBS डिग्री के दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा, जांच में डॉक्टर सुप्रिया पाठक के बैंक खाते में लगभग 40 लाख रुपए के संदिग्ध लेन-देन का भी खुलासा हुआ है।
ठगी में शामिल अन्य आरोपी
पुलिस ने नरेश के साथ हीरा दिवाकर, राकेश रात्रे और सारंगढ़-बिलाईगढ़ निवासी भुनेश्वर बंजारे को भी गिरफ्तार किया है।
कोई रकम वसूलने का काम करता था
कोई दस्तावेज़ और रिकॉर्ड संभालता था
तो कोई बैंक खातों के संचालन में सहयोग करता था
पहले भी कर चुका है अपराध
पुलिस के अनुसार, नरेश मनहरे पहले भी ठगी के मामलों में जेल जा चुका है। वर्ष 2024 में उसने सक्ति जिला के छपोरा गांव में एसबीआई के नाम से फर्जी ग्राहक सेवा केंद्र खोलकर लोगों को ठगने की कोशिश की थी, जिस पर समय रहते कार्रवाई हो गई थी।
दिल्ली से रायपुर तक फैला नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि नरेश ने दिल्ली से लेकर रायपुर तक ठगी का नेटवर्क खड़ा किया था। उसने गुडलक माइक्रो फाइनेंस के नाम से दो GST रजिस्ट्रेशन कराए हैं, जिनमें से एक ऑफिस अभनपुर में संचालित हो रहा है। पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।