पन्ना पद्मावती शक्तिपीठ: मध्यप्रदेश का पन्ना जिला हीरों की खदानों और प्राचीन मंदिरों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इन्हीं धार्मिक स्थलों में प्रमुख है आदिशक्ति पीठ मां पद्मावती देवी मंदिर, जिसे बुंदेलखंड ही नहीं बल्कि देशभर से श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान दर्शन करने आते हैं। शरद नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही पन्ना में पद्मावती मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। सुबह से ही श्रद्धालु जल और फूल अर्पित कर मां को समर्पित कर रहे हैं। स्थानीय लोग देवी को बड़ी देवन कहकर पूजते हैं। लोगों का कहना है कि यहां मां की कृपा से हर इच्छा पूरी होती है।
मान्यता और पौराणिक कथा
मान्यता है कि जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अपमानित होकर देह त्याग दी थी, तब भगवान शिव क्रोध में उनके शरीर को लेकर विचरण कर रहे थे। इसी दौरान माता सती के अंग देशभर में कई स्थानों पर गिरे, जिनमें से एक पन्ना भी है। कहा जाता है कि यहां माता के चरण गिरे थे, इसी कारण यह स्थान शक्तिपीठ कहलाता है।
पद्मावत राजा ने की थी स्थापना
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में पद्मावत नामक राजा ने इस मंदिर की स्थापना की थी। पद्मावती देवी का उल्लेख भविष्य पुराण और विष्णु पुराण में भी मिलता है। कालांतर में इस स्थान को पद्मावतीपुरी धाम कहा जाने लगा, जो आगे चलकर पन्ना नगर के नाम से विख्यात हुआ। गौड़ राजाओं ने भी इस मंदिर को अपना आराध्य माना।
विशेष त्रिकोणीय शक्ति धाम
धार्मिक जानकार बताते हैं कि पन्ना का पद्मावती मंदिर, मैहर का शारदा देवी मंदिर और पवई का कलेही माता मंदिर आपस में 60-60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। ये तीनों मंदिर एक त्रिकोणीय शक्ति धाम का स्वरूप प्रस्तुत करते हैं, जिसे अनूठा आध्यात्मिक संयोग माना जाता है।
मंदिर की विशेषताएं
यहां जाति और धर्म से ऊपर उठकर हर कोई श्रद्धा भाव से दर्शन करने पहुंचता है। नवरात्रि के अवसर पर कन्या पूजन और भंडारे का आयोजन लगातार चलता रहता है। मंदिर परिसर में एक प्राचीन शिलालेख भी मौजूद है, जिसे ब्राह्मी लिपि में लिखा गया माना जाता है। 10वीं शताब्दी के तुर्क यात्री इब्ने कुर्रदान ने भी अपने यात्रा विवरण में इस धाम का उल्लेख किया था।