रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े मामले में एक बार फिर फैसला टल गया है। NIA की विशेष अदालत में सोमवार, 31 अगस्त 2026 को निर्णय सुनाया जाना था, लेकिन अदालत ने फैसला सुनाने की तारीख आगे बढ़ा दी है। अब इस मामले में 5 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया जाएगा।
करीब 13 साल पुराने इस मामले में अंतिम बहस पहले ही पूरी हो चुकी है और अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा था। ऐसे में 31 अगस्त को फैसले का इंतजार कर रहे पीड़ित परिवारों और प्रदेशवासियों को एक बार फिर तारीख आगे बढ़ने से इंतजार करना पड़ेगा। अब सबकी नजरें 5 सितंबर पर टिकी हैं।
11 आरोपियों के खिलाफ चली सुनवाई
झीरम घाटी मामले में अभियोजन की कार्रवाई कुल 11 आरोपियों के खिलाफ चली। मुकदमे की सुनवाई के दौरान इनमें से एक आरोपी की मौत हो गई, जबकि बाकी आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया जारी रही। मामले में अभियोजन पक्ष ने आरोपों के समर्थन में गवाहों और दस्तावेजों समेत विभिन्न साक्ष्य अदालत के सामने रखे। लंबी सुनवाई के बाद दोनों पक्षों की ओर से अंतिम दलीलें पूरी की गईं।
101 गवाहों के बयान दर्ज
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 101 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज किए गए। गवाहों की गवाही के अलावा कई दस्तावेजी और अन्य साक्ष्य भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब 5 सितंबर को आने वाले निर्णय से यह साफ होगा कि अदालत आरोपियों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों को किस रूप में स्वीकार करती है।
31 अगस्त को क्यों नहीं आया फैसला?
अदालत ने पहले 31 अगस्त को फैसला सुनाने की तारीख तय की थी। सोमवार को इस मामले में निर्णय आने की उम्मीद थी, लेकिन अदालत ने फैसला सुनाने के बजाय इसे आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। अब 5 सितंबर को निर्णय सुनाए जाने की नई तारीख निर्धारित की गई है। हालांकि फैसले को आगे बढ़ाने की वजह को लेकर उपलब्ध जानकारी में विस्तृत कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को हुआ था। दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कई नेताओं की मौत हुई थी। हमले में सुरक्षा बलों और अन्य लोगों की भी जान गई थी। यह घटना छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे बड़े और गंभीर नक्सली हमलों में गिनी जाती है।
13 साल बाद फैसले पर टिकी निगाहें
झीरम घाटी हमले को अब करीब 13 साल बीत चुके हैं। इतने लंबे समय से मामले में न्यायिक निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवारों के लिए 5 सितंबर की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। NIA की विशेष अदालत का फैसला मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय करेगा। अदालत के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और 101 गवाहों की गवाही के आधार पर आरोपियों के संबंध में क्या निष्कर्ष निकाला गया है। फिलहाल 31 अगस्त को फैसला नहीं आने के बाद एक बार फिर 5 सितंबर 2026 की तारीख पर सभी की नजरें टिक गई हैं।