गरियाबंद। सावन सोमवार भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन अवसर माना जाता है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मरौदा गांव स्थित भूतेश्वरनाथ महादेव (भकुर्रा महादेव) धाम एक बार फिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस धाम को लेकर वर्षों से यह मान्यता प्रचलित है कि यहां विराजमान स्वयंभू शिवलिंग का आकार समय के साथ लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों और मंदिर समिति के अनुसार शिवलिंग की ऊंचाई और चौड़ाई में हर वर्ष धीरे-धीरे वृद्धि दर्ज की जाती है। इसी वजह से सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
14 वर्षों की तस्वीरों में दिखा बड़ा बदलाव
वर्ष 2012 और 2026 में उपलब्ध तस्वीरों के तुलनात्मक अवलोकन में शिवलिंग का स्वरूप पहले की तुलना में अधिक विशाल दिखाई देता है। मंदिर समिति का कहना है कि महाशिवरात्रि के अवसर पर हर साल शिवलिंग की ऊंचाई और मोटाई का मापन किया जाता है तथा उसमें वृद्धि दर्ज होने का दावा किया जाता है। हालांकि, इस मान्यता की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है और यह स्थानीय धार्मिक विश्वास पर आधारित है।
भकुर्रा महादेव नाम के पीछे छिपी है रोचक कथा
भूतेश्वरनाथ महादेव समिति के पदाधिकारियों के अनुसार लगभग तीन दशक पहले जहां आज मंदिर स्थित है, वहां गौठान हुआ करता था। उस स्थान पर केवल नंदी महाराज की प्रतिमा स्थापित थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि वहां से गुजरने वालों को अक्सर रहस्यमयी हुंकार जैसी आवाज सुनाई देती थी। बाद में संतों और विद्वानों ने उस चट्टान को स्वयंभू शिवलिंग के रूप में पहचान दी और नियमित पूजा-अर्चना प्रारंभ हुई। छत्तीसगढ़ी भाषा में हुंकार जैसी आवाज को "भकुर्रा" कहा जाता है। इसी कारण इस स्थान का नाम भकुर्रा महादेव प्रसिद्ध हुआ। इसके बाद यहां शिवरात्रि पर मानस यज्ञ और विशाल मेले की परंपरा भी शुरू हुई, जो आज तक जारी है।
सावन में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
सावन सोमवार और महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह धाम धार्मिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है।