राहुल टेभरे, बालाघाट: बालाघाट का टेमनी गावं कभी ऐसा क्षेत्र माना जाता था, जहां तिरंगा फहराने तक पर धमकियां मिलती थीं। आज उसी इलाके में शिक्षा के माध्यम से बदलाव की नई तस्वीर उभर रही है। इस बदलाव में बैगा शिक्षक धनसिंह धुर्वे और डीएसपी संतोष पटेल की संयुक्त पहल प्रेरणादायक बनकर सामने आई है।
सड़त पर घमते मिले बच्चे
नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन 1 जुलाई को टेमनी और सायर- संदूका गांव के कई बच्चे स्कूल जाने के बजाय पहली बारिश का आनंद लेने के लिए पुलिया और सड़क किनारे घूमते मिले। इस दौरान डीएसपी संतोष पटेल और शिक्षक धनसिंह धुर्वे ने बच्चों से आत्मीयता से बातचीत की और उन्हें शिक्षा का महत्व समझाया। इसके बाद दोनों गांव पहुंचे और अभिभावकों से भी मुलाकात की।
बच्चों को दी ड्रेस और किताबे
उन्होंने अभिभावकों को समझाया कि बच्चों का भविष्य खेत, जंगल या सड़कों पर भटकने से नहीं, बल्कि विद्यालय की शिक्षा से संवर सकता है। अभिभावकों को प्रेरित किया गया कि वे बच्चों को नहलाकर, साफ-सुथरी ड्रेस पहनाकर नियमित रूप से स्कूल छोड़ने आएं। इस दौरान डीएसपी संतोष पटेल ने बच्चों स्कूल ड्रेस, किताबें और स्कूल बैग का वितरण भी किया। जहां समझाइश का सकारात्मक असर देखने को मिला और कई अभिभावकों ने तत्काल वहीं बच्चों को तैयार कर विद्यालय भेजा।
बता दें कि बैगा शिक्षक धनसिंह धुर्वे पिछले 18 वर्षों से इस दुर्गम आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। वे कई बार खेतों और जंगलों से बच्चों को अपनी मोटर-साइकिल पर बैठाकर स्कूल लाते हैं, ताकि कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे।
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