रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना राज्य के भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना के रूप में सामने आई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष ₹10,000 की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जा रही है।
योजना का उद्देश्य उन परिवारों को आर्थिक संबल देना है, जिनके पास स्वयं की कृषि भूमि नहीं है और जिनकी आय का मुख्य स्रोत मजदूरी है।
2025 में हुई थी योजना की शुरुआत
इस योजना का शुभारंभ 20 जनवरी 2025 को किया गया था। पहले चरण में 5,62,112 भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को लाभ देने के लिए 562.11 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे।
योजना का दायरा केवल खेतिहर मजदूरों तक सीमित नहीं है। इसमें वनोपज संग्राहक, चरवाहे, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी, पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवारों के अलावा अनुसूचित क्षेत्रों के पारंपरिक सेवा कार्य करने वाले परिवारों को भी शामिल किया गया है।
2026-27 बजट में 600 करोड़ रुपये का प्रावधान
योजना को लगातार संचालित रखने के लिए राज्य सरकार ने 2026-27 के बजट में 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। सरकार का कहना है कि ई-केवाईसी प्रक्रिया के बाद लाभार्थियों की सूची और अधिक पारदर्शी हुई है।
रायपुर, बिलासपुर और महासमुंद जैसे जिलों में सर्वाधिक लाभार्थी हैं, जबकि नारायणपुर, कोरिया और बीजापुर जैसे आदिवासी क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में पात्र परिवार इस योजना का लाभ ले रहे हैं।
4.95 लाख परिवारों के खातों में पहुंची करीब 496 करोड़ रुपये की सहायता
योजना के नवीनतम चरण में 25 मार्च 2026 को आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 4,95,965 लाभार्थी परिवारों के बैंक खातों में 495.96 करोड़ रुपये DBT के माध्यम से हस्तांतरित किए।
सरकार का कहना है कि यह सहायता राशि परिवारों की शिक्षा, स्वास्थ्य, घरेलू जरूरतों और आजीविका को मजबूत करने में उपयोगी साबित हो रही है।
लाभार्थियों की जिंदगी में आया बदलाव
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की चमेली सेन ने बताया कि योजना से मिली सहायता से वह अपने बच्चों की नर्सिंग और इंजीनियरिंग की पढ़ाई का खर्च उठा पा रही हैं।
इसी तरह धन्नूलाल धीवर ने बताया कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए कर्ज लेना पड़ता था, लेकिन अब वार्षिक सहायता से कई आवश्यक खर्च पूरे हो जाते हैं।
महासमुंद निवासी शिवलाल साहू का कहना है कि इस राशि से बेटियों की उच्च शिक्षा जारी रखने में मदद मिली है। वहीं मालगांव के प्रकाश शांडिल्य ने सहायता राशि का उपयोग बंटाई पर खेती शुरू करने में किया, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई।
अन्य योजनाओं के साथ मिल रहा अतिरिक्त लाभ
सरकार के अनुसार जब यह योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं के साथ जुड़ती है, तो गरीब परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में व्यापक सुधार देखने को मिलता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती
राज्य सरकार का दावा है कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, गरीब परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। DBT के माध्यम से पारदर्शी भुगतान और पर्याप्त बजटीय प्रावधान के कारण लाखों पात्र परिवारों तक सरकारी सहायता समय पर पहुंच रही है।