Budget Session 2026: संसद के बजट सत्र का शुक्रवार को 13वां दिन है और इसी के साथ पहले चरण की कार्यवाही समाप्त हो रही है। बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है, जिसका दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। अंतिम दिन भी सदन का माहौल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहसों से गर्म बना रहा। गुरुवार को इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड (अमेंडमेंट) बिल, 2026 लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से पारित हुआ।
औद्योगिक संबंध संहिता 2020 में आवश्यक बदलाव:
इस संशोधन का उद्देश्य औद्योगिक संबंध संहिता 2020 में आवश्यक बदलाव कर श्रम व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना बताया गया है। इस बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए सब्सटेंसिव मोशन पेश किया। उन्होंने राहुल गांधी की संसद सदस्यता समाप्त करने और चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग भी उठाई।
पिछले दिनों की प्रमुख घटनाएं:
12 फरवरी: विशेषाधिकार प्रस्ताव पर सियासत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार राहुल गांधी के भाषण को लेकर विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं लाने की तैयारी में है। इस पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि यदि आरोपों के आधार पर कार्रवाई होनी है तो समान नियम सब पर लागू होने चाहिए।
स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव:
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया, जिस पर 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर बताए गए। हालांकि प्रस्ताव के भविष्य को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सदन में हंगामा और बाधित कार्यवाही:
कई दिनों तक लोकसभा की कार्यवाही कुछ मिनटों में ही स्थगित होती रही। विपक्ष राहुल गांधी को बोलने देने की मांग करता रहा, जबकि सत्ता पक्ष उनके बयानों पर आपत्ति जताता रहा। रक्षा मामलों से जुड़े एक संदर्भ पर बोलते समय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने हस्तक्षेप भी किया।
बजट और आर्थिक सर्वे:
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में टैक्स फाइलिंग को आसान बनाने, रेलवे परियोजनाओं और नए आयुष संस्थानों जैसी घोषणाएं कीं। आर्थिक सर्वे के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी वृद्धि दर 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है।
आगे क्या:
बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होगा, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों, विधायी कार्यों और राजनीतिक मुद्दों पर फिर से तीखी बहस होने की संभावना है। पहले चरण में जिस तरह का टकराव देखने को मिला, उससे संकेत मिलते हैं कि आने वाले दिनों में संसद का माहौल और अधिक राजनीतिक हो सकता है।