हरिभूमि के जिला संवाद कार्यक्रम में बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के विकास, कानून व्यवस्था, जंगल संरक्षण, उद्योग, रोजगार और टेक्नोलॉजी आधारित प्रशासनिक सुधारों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में हरिभूमि के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने जिले के कलेक्टर कुलदीप शर्मा, पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता और डीएफओ से सवाल-जवाब के जरिए जिले की मौजूदा स्थिति और भविष्य की प्राथमिकताओं को सामने रखा।
कार्यक्रम में यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासन शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, ट्रैफिक व्यवस्था, अवैध गतिविधियों पर रोक और टेक्नोलॉजी के बेहतर उपयोग को लेकर गंभीर है। अधिकारियों ने दावा किया कि जिले में विकास की अपार संभावनाएं हैं और आने वाले समय में इन्हें योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने कहा- चुनौती से ज्यादा जिम्मेदारी है जिला
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने नवपदस्थ कलेक्टर कुलदीप शर्मा से पूछा कि एक चुनौतीपूर्ण जिले की कमान संभालने का अनुभव कैसा है। इस पर कलेक्टर ने कहा कि बलौदाबाजार-भाटापारा जिला ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, औद्योगिक और कृषि दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे जिले की जिम्मेदारी मिलना उनके लिए चुनौती से ज्यादा एक बड़ा दायित्व है।
कुलदीप शर्मा ने बताया कि पदभार संभालने के बाद उन्होंने जिले के विभिन्न ब्लॉकों का दौरा कर जमीनी हालात समझने की कोशिश की। उनके मुताबिक जिले में विकास की काफी संभावनाएं हैं और जनप्रतिनिधियों व समाज के लोगों की इच्छा है कि जिला राज्य ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाए।
शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि को प्रशासन ने बताया शीर्ष प्राथमिकता
डॉ. हिमांशु द्विवेदी के सवालों के जवाब में कलेक्टर ने कहा कि जिले में सबसे ज्यादा अपेक्षाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षा में केवल भवन और आधारभूत संरचना ही नहीं, बल्कि बच्चों के लर्निंग आउटकम, शिक्षक प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी पर भी फोकस किया जाएगा।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रशासन की कोशिश शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी सुविधाएं मजबूत करने की है। वहीं कृषि में सिंचित रकबा बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने और फसल विविधीकरण पर जोर दिया जाएगा।
कलेक्टर ने बताया कि जिले में उद्योग रोजगार का बड़ा माध्यम हैं और सात सीमेंट कारखानों के जरिए लगभग 20 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। प्रशासन का प्रयास रहेगा कि स्थानीय युवाओं को तकनीकी जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जाए ताकि उन्हें उद्योगों में ज्यादा अवसर मिल सकें।
भाटापारा के लिए ट्रैफिक, सड़क चौड़ीकरण और सेवाओं की पहुंच पर जोर
कार्यक्रम में भाटापारा को लेकर भी सवाल उठे। इस पर कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने कहा कि भाटापारा जिले का अभिन्न हिस्सा है और वहां की जरूरतों को अलग से सूचीबद्ध कर कार्ययोजना बनाई जाएगी। उन्होंने माना कि भाटापारा में ट्रैफिक व्यवस्था एक प्रमुख चुनौती है।
कलेक्टर के मुताबिक रोड चौड़ीकरण, बायपास निर्माण और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक सेवाओं की बेहतर उपलब्धता पर फोकस रहेगा, ताकि लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए बलौदाबाजार न आना पड़े।
SP भावना गुप्ता ने कहा- डर उतारकर वर्दी पहनते हैं
डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने जब जिले की कानून व्यवस्था पर सवाल किया तो पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने कहा कि वर्दी पहनते समय डर को उतारना पड़ता है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी है, लेकिन पिछले एक वर्ष में स्थिति में सुधार आया है।
SP ने कहा कि पुलिस का लक्ष्य दोतरफा है—जनता पुलिस को अपना मित्र समझे और अपराधियों में कानून का खौफ बना रहे। इसके लिए सख्ती और संवेदनशीलता दोनों के साथ काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रिवेंटिव पुलिसिंग, हैबिचुअल ऑफेंडर्स पर कार्रवाई, रासुका, जिला बदर जैसे कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल किया गया है।
QR फीडबैक, कैमरे और सर्विलांस से बदल रही पुलिसिंग
पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने बताया कि जिले में पुलिसिंग को टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ा जा रहा है। थाना स्तर पर QR आधारित फीडबैक सिस्टम शुरू किया गया है, ताकि थाने आने वाले लोग अपने अनुभव साझा कर सकें और सुझाव सीधे एसपी ऑफिस तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि जिले में 250 से ज्यादा कैमरे लगाए गए हैं और कई स्थानों पर ANPR तकनीक के जरिए वाहनों की नंबर प्लेट कैप्चर की जा रही है। सिमगा क्षेत्र में सिटी सर्विलांस सिस्टम शुरू होने से हाईवे से गुजरने वाले वाहनों की जानकारी मिल रही है, जिससे अपराधों की जांच और ट्रैफिक नियंत्रण में मदद मिली है।
SP ने यह भी बताया कि जिले में हाल ही में साइबर थाना शुरू हुआ है, जिससे साइबर अपराधों पर नियंत्रण और शिकायतों के निपटारे में मदद मिलेगी।
अवैध रेत, शराब और अन्य गतिविधियों पर संयुक्त कार्रवाई
डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने जिले में अवैध रेत उत्खनन और दूसरी गैरकानूनी गतिविधियों पर सवाल किया। इसके जवाब में SP ने कहा कि ऐसे मामलों में संयुक्त कार्रवाई की जरूरत होती है, क्योंकि इनमें पुलिस, राजस्व और अन्य विभागों की भूमिका होती है।
उन्होंने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों की हॉटस्पॉट मैपिंग की गई है और संयुक्त टीमों द्वारा निगरानी व कार्रवाई की जा रही है। कई मामलों में केवल राजस्व कार्रवाई तक सीमित न रहकर एफआईआर भी दर्ज की गई है, ताकि सख्त संदेश जाए।
DFO ने कहा- बारनवापारा में लेपर्ड साइटिंग बेहतर, ईको-टूरिज्म की बड़ी संभावना
जिला संवाद में वन और पर्यटन के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा हुई। डीएफओ ने बताया कि बलौदाबाजार जिला प्राकृतिक रूप से समृद्ध है और बारनवापारा क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी अच्छी है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में यहां लेपर्ड साइटिंग बेहतर हुई है और बाघ की मौजूदगी भी दर्ज की गई है।
DFO के मुताबिक बारनवापारा को केवल पारंपरिक वन्यजीव पर्यटन की तरह नहीं, बल्कि लेसर-नोन स्पीशीज, पक्षी प्रेमियों और सांस्कृतिक-ऐतिहासिक पर्यटन के साथ जोड़कर विकसित करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि बफर क्षेत्र बढ़ाने और ईको-टूरिज्म की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
जंगल संरक्षण में युवाओं और गांवों की भूमिका पर जोर
जंगलों की कटाई और संरक्षण को लेकर पूछे गए सवाल पर डीएफओ ने कहा कि जिले में अभी अवैध कटाई की गंभीर स्थिति नहीं है। उन्होंने इसका कारण लोगों में बढ़ती जागरूकता और गांव स्तर पर वन प्रबंधन समितियों की सक्रियता को बताया।
DFO ने जानकारी दी कि वन संरक्षण से युवाओं को जोड़ने के लिए ‘युवान’ नाम से एक पहल शुरू की गई है, जिसमें ‘युवा’ और ‘वन’ को मिलाकर वालंटियर नेटवर्क तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि 400 से अधिक युवाओं ने इसमें पंजीकरण कराया है और उन्हें वन, वन्यजीव तथा पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की दिशा में काम हो रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि फायर मैनेजमेंट पर बेहतर काम हुआ है और पिछले वर्षों की तुलना में वनाग्नि की घटनाओं में 80 से 90 प्रतिशत तक कमी लाने में सफलता मिली है।
हाथियों की निगरानी में ऐप और ड्रोन का इस्तेमाल
DFO ने बताया कि जिले में वन विभाग भी टेक्नोलॉजी का उपयोग बढ़ा रहा है। हाथियों की निगरानी के लिए मोबाइल ऐप और थर्मल ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके अनुसार जिले में करीब 30 हाथियों की मौजूदगी है और उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
इसके अलावा अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी, पानी की उपलब्धता और संभावित खतरों की जानकारी जुटाने के लिए भी तकनीकी साधनों का उपयोग किया जा रहा है।
DMF को लेकर कलेक्टर ने कहा- पारदर्शी उपयोग हमारी प्राथमिकता
जिला खनिज न्यास निधि यानी DMF को लेकर भी कार्यक्रम में सवाल उठे। इस पर कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने कहा कि डीएमएफ जिले के लिए एक वैकल्पिक वित्तीय स्रोत है, जिसका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आधारभूत ढांचे जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि डीएमएफ के तहत बनने वाली वार्षिक कार्ययोजना में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी होती है। स्वीकृत कार्यों की सूची पोर्टल पर उपलब्ध रहती है और सोशल ऑडिट के माध्यम से उनकी जांच भी की जाती है। कलेक्टर ने साफ कहा कि राशि का पारदर्शी और सही उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है।