उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने संरक्षित वन्यजीव चीतल का शिकार किया था। वन विभाग को मिली गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई, जिसमें शिकार से जुड़ी कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है।
सूचना मिलते ही टीम ने की छापेमारी
वन विभाग की एंटी पोचिंग टीम को ग्राम अमाड़ में वन्यजीव शिकार की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के बाद विभाग ने डॉग स्क्वॉड और स्थानीय वन अमले के साथ संयुक्त अभियान चलाया। आवश्यक अनुमति और सर्च वारंट के आधार पर संदिग्धों के घरों की तलाशी ली गई।
घरों से मिला चीतल का मांस और शिकार सामग्री
तलाशी के दौरान अधिकारियों को पकाया हुआ चीतल का मांस, खून के निशान लगे तीर, वन्यजीवों को पकड़ने के फंदे, मयूर और बाज के पंख, धनुष तथा अन्य शिकार उपकरण मिले। बरामद सामग्री को जब्त कर आरोपियों को पूछताछ के लिए वन विभाग के कार्यालय लाया गया।
पूछताछ में कबूला शिकार
प्रारंभिक पूछताछ में एक आरोपी ने चीतल के शिकार में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। उसने बताया कि कुछ दिन पहले जंगल क्षेत्र में तीर-धनुष की मदद से वन्यजीव का शिकार किया गया था। इसके बाद वन विभाग की टीम आरोपियों को घटनास्थल पर लेकर पहुंची, जहां शिकार से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि की गई।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जबकि बरामद मांस के नमूनों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए फॉरेंसिक जांच प्रयोगशाला भेजा गया है।
वन विभाग ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
वन विभाग ने कहा है कि संरक्षित वन्यजीवों के शिकार और अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है। इस अभियान में एंटी पोचिंग टीम, वन अमला और डॉग स्क्वॉड की महत्वपूर्ण भूमिका रही।