रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा में कथित पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तीन आरोपियों के खिलाफ करीब 3700 पन्नों की चार्जशीट पेश की है। आरोपियों में CGPSC के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, उत्कर्ष चंद्राकर और चेतन बोरघरिया शामिल हैं। चार्जशीट में करीब 99 पन्नों की समरी भी शामिल बताई गई है। ईडी की जांच CGPSC की वर्ष 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं पर केंद्रित है। ईडी ने पहले भी इस मामले में कई स्थानों पर तलाशी और गिरफ्तारियां की हैं।
पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप
ईडी के आरोपों के मुताबिक, CGPSC की भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के लिए टामन सिंह सोनवानी ने कुछ सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर साजिश रची। जांच एजेंसी का दावा है कि अभ्यर्थियों से रकम लेकर उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और पसंदीदा उम्मीदवारों के चयन में मदद करने की कोशिश की गई। जांच में डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे वरिष्ठ पदों पर चयन से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है। ईडी के अनुसार, कथित तौर पर कुछ उम्मीदवारों को प्रभाव और संपर्क के माध्यम से लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
कैश और बैंक खातों के जरिए रकम के लेन-देन का दावा
ईडी की जांच में कथित अवैध रकम के लेन-देन के तरीके को भी खंगाला गया है। एजेंसी के अनुसार, मामले से जुड़ी रकम का एक हिस्सा नकद और दूसरा हिस्सा बैंकिंग चैनल के जरिए लिया गया। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर उसके स्रोत और वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने की कोशिश की गई। जांच एजेंसी मनी ट्रेल के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अपराध से प्राप्त रकम कहां से आई, किन खातों में पहुंची और किन लोगों को इसका फायदा मिला। ईडी ने इस मामले में वित्तीय दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जुटाए हैं।
उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी पहले हुई
ईडी ने 1 सितंबर 2026 को उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया था। इससे पहले रायपुर, दुर्ग और जशपुर जिलों में पांच ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया था। ईडी के मुताबिक, तलाशी के दौरान जांच से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति संबंधी दस्तावेज समेत अन्य सामग्री जब्त की गई। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि उत्कर्ष चंद्राकर और अन्य लोगों ने अभ्यर्थियों से कथित तौर पर रकम लेकर CGPSC परीक्षा के प्रश्नपत्र पहले उपलब्ध कराने और चयन में मदद करने का भरोसा दिया था। मीडिया रिपोर्टों में ईडी के हवाले से इस कथित लेन-देन की राशि 3 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
चेतन बोरघरिया भी जांच के दायरे में
ईडी ने 11 सितंबर 2026 को चेतन बोरघरिया को PMLA के तहत गिरफ्तार किया था। ईडी के अनुसार, बोरघरिया पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD के पद पर रह चुके थे और बाद में बलरामपुर-रामानुजगंज में अतिरिक्त कलेक्टर के पद पर पदस्थ थे। उनकी गिरफ्तारी CGPSC की 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में हुई। मामले में ईडी की जांच अभी जारी है। एजेंसी कथित अपराध से हुई आय, बैंक लेन-देन और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। चार्जशीट में लगाए गए आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं और मामले का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही के बाद ही सामने आएगा।