रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत धान खरीदी को लेकर राज्य सरकार ने पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी का दावा किया है। सरकार के अनुसार धान खरीदी के दौरान 3 से 6 प्रतिशत तक सूखत (Dry Loss) को सामान्य माना गया है, जबकि इससे अधिक सूखत पाए जाने पर जांच की कार्रवाई की जा रही है। सरकार का कहना है कि अब डिजिटल टोकन, ऑनलाइन रिकॉर्ड, स्टोरेज ट्रैकिंग और भुगतान प्रणाली के माध्यम से धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ट्रैक-योग्य हो चुकी है। इससे किसानों को उनके धान का पूरा और समय पर मूल्य मिल रहा है।
रिकॉर्ड धान खरीदी और भुगतान का दावा:
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 105.14 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। 17.77 लाख किसानों के बैंक खातों में कुल ₹23,448 करोड़ की राशि सीधे ट्रांसफर की गई है। 13 जनवरी तक की खरीदी और भुगतान ने सभी पूर्व वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। राज्य सरकार का दावा है कि यह अब तक की सबसे अधिक मात्रा और सबसे अधिक राशि का वितरण है।
अनियमितताओं पर सख्ती, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस:
धान खरीदी में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने की बात कही है। अनियमितता के मामलों में 33 अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।कई मामलों में FIR दर्ज, निलंबन और विभागीय जांच की कार्रवाई की गई है। भंडारण, परिवहन और निराकरण की प्रक्रिया भी तकनीकी निगरानी में रखी जा रही है।
धान खरीदी का समय बढ़ाने की मांग:
इस बीच धान खरीदी को लेकर राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए धान खरीदी की समय सीमा एक माह बढ़ाने की मांग की है। डॉ. महंत ने आरोप लगाया कि सर्वर डाउन रहने, ई-केवाईसी की जटिल प्रक्रियाओं के कारण हजारों किसान अब तक अपना धान नहीं बेच पाए हैं। उन्होंने सरकार को “मोदी की गारंटी वाली डबल स्टैंडर्ड सरकार” बताते हुए किसानों के साथ अन्याय का आरोप लगाया।
नेता प्रतिपक्ष की प्रमुख मांगें:
आत्महत्या का प्रयास करने वाले किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए। धान खरीदी की समय सीमा एक माह तक बढ़ाई जाए। जिन किसानों का धान तकनीकी कारणों से नहीं बिक पाया है, उनके लिए ऑफलाइन टोकन जारी कर प्राथमिकता से खरीदी की जाए।