छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के नाम पर कथित गड़बड़ियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। आयुष्मान कार्ड के जरिए फर्जी इलाज और योजना के नियमों के उल्लंघन की शिकायतों के बाद बुधवार को प्रदेशभर के 100 से ज्यादा अस्पतालों और नर्सिंग होम में जांच और छापेमारी की गई।
इस कार्रवाई के बीच आयुष्मान योजना से जुड़े मामलों की जांच रिपोर्ट में भी कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने की बात कही जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर दो नर्सिंग होम का पंजीयन निरस्त करने और दो डॉक्टरों के पंजीयन पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
100 से ज्यादा अस्पतालों में पहुंची जांच टीम
आयुष्मान योजना के तहत मरीजों के इलाज, भर्ती, डिस्चार्ज और क्लेम से जुड़ी शिकायतों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अस्पतालों की जांच शुरू की है।
विभागीय कार्रवाई का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि कहीं आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल ऐसे इलाज के लिए तो नहीं किया जा रहा, जो वास्तव में मरीज को दिया ही नहीं गया। इसके अलावा मरीजों को अनावश्यक रूप से भर्ती रखने, एक साथ बड़ी संख्या में मरीजों को डिस्चार्ज करने और योजना के तहत मिलने वाली राशि के लिए गलत तरीके से क्लेम करने जैसे बिंदुओं की भी जांच की जा रही है।
मेडलाइफ सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
जांच रिपोर्ट में मेडलाइफ सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल से जुड़ा मामला भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक मरीज को हाथ-पैर में दर्द की शिकायत के बावजूद करीब 8 दिन तक अस्पताल में भर्ती रखा गया।
जांच के दौरान मरीज के भर्ती रहने की अवधि और इलाज से संबंधित रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठे हैं। विभाग अब यह देख रहा है कि मरीज को इतनी लंबी अवधि तक भर्ती रखने और उसके नाम पर किए गए उपचार से जुड़े दावे नियमों के अनुरूप थे या नहीं।
एक साथ 26 मरीजों को कर दिया गया डिस्चार्ज
जांच के दौरान अस्पतालों की डिस्चार्ज प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक ही समय पर 26 मरीजों को एक साथ डिस्चार्ज किए जाने की बात सामने आई है।
इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के एक साथ डिस्चार्ज होने की प्रक्रिया को जांच टीम ने गंभीरता से लिया है। अब संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि इन मरीजों का इलाज वास्तव में किस तरह किया गया था।
सरायपाली से एक साथ मरीज लाने की पुष्टि
जांच में मरीजों को अस्पताल तक लाने के तरीके को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, सरायपाली से स्कॉर्पियो वाहन में एक साथ कई मरीजों को लाए जाने की पुष्टि हुई है।
इस मामले में भी जांच टीम ने मरीजों के अस्पताल पहुंचने, भर्ती होने और उनके इलाज से संबंधित रिकॉर्ड को खंगाला है। आयुष्मान योजना के तहत मरीजों की भर्ती और उपचार की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के मुताबिक हुई या नहीं, इसकी जांच की जा रही है।
लोटस हॉस्पिटल में इलाज के दौरान कैश लेने की पुष्टि
लोटस हॉस्पिटल से जुड़े मामले में जांच के दौरान मरीज से इलाज के दौरान नकद राशि लेने की पुष्टि होने की बात सामने आई है।
आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और अस्पताल द्वारा लिए गए भुगतान की जांच की गई। रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के खिलाफ नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीयन निरस्त करने की अनुशंसा की गई है।
दो नर्सिंग होम का पंजीयन रद्द करने की अनुशंसा
जांच रिपोर्ट में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर दो नर्सिंग होम का पंजीयन निरस्त करने की अनुशंसा की गई है। विभागीय जांच में मरीजों के इलाज, भर्ती, डिस्चार्ज और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड में मिली कथित गड़बड़ियों को कार्रवाई का आधार बनाया गया है। अब संबंधित स्तर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दो डॉक्टरों पर भी कार्रवाई की सिफारिश
मामला सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं है। जांच रिपोर्ट में डॉ. विकास अग्रवाल और डॉ. आशीष शर्मा के पंजीयन को भी निरस्त करने की अनुशंसा किए जाने की जानकारी सामने आई है। दोनों डॉक्टरों से जुड़े मामलों में जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर यह अनुशंसा की गई है। अंतिम कार्रवाई संबंधित सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद स्पष्ट होगी।
आयुष्मान योजना के क्लेम की होगी और गहराई से जांच
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों द्वारा किए जा रहे क्लेम और मरीजों के उपचार रिकॉर्ड की जांच और तेज होने की संभावना है। खास तौर पर मरीजों की भर्ती अवधि, डिस्चार्ज रिकॉर्ड, एक ही समय पर बड़ी संख्या में मरीजों को डिस्चार्ज किए जाने, मरीजों को दूसरे क्षेत्रों से एक साथ लाने और इलाज के दौरान नकद भुगतान लेने जैसे मामलों को जांच के दायरे में रखा गया है।
विभाग की कार्रवाई से अस्पतालों में हड़कंप
आयुष्मान योजना गरीब और जरूरतमंद मरीजों को इलाज की सुविधा देने के उद्देश्य से संचालित की जाती है। ऐसे में योजना के नाम पर किसी भी तरह की कथित अनियमितता सामने आने पर विभाग की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 100 से ज्यादा अस्पतालों में हुई जांच के बाद अब यह देखना अहम होगा कि विभागीय जांच में और कितने अस्पतालों के खिलाफ अनियमितताएं सामने आती हैं और किन संस्थानों पर आगे कार्रवाई की जाती है।