बिहार के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में मोकामा के विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उनकी जमानत रद्द कर दी। अदालत ने साफ कहा कि हत्या जैसे गंभीर मामले को केवल राजनीतिक विवाद मानकर नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने हाई कोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगाते हुए अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है। साथ ही पुलिस को अगले चार महीने के भीतर जांच पूरी करने को कहा गया है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है। जांच पूरी होने के बाद मुकदमे के दौरान गवाहों के बयान और साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले को सामान्य राजनीतिक टकराव की तरह देखना उचित नहीं होगा।
बताया जा रहा है कि अनंत सिंह ने अपनी बेटी की शादी का हवाला देते हुए तत्काल सरेंडर करने से राहत मांगी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द करते हुए सरेंडर के लिए 1 दिसंबर की समयसीमा तय कर दी।
जेडीयू ने पहले ही पार्टी से किया बाहर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही अनंत सिंह को जेडीयू से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। पार्टी ने उनकी पत्नी के खिलाफ भी कार्रवाई की है। इसके अलावा अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजे जाने की बात सामने आई है।
इस पूरे घटनाक्रम पर जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि पार्टी अनुशासन के आधार पर चलती है और बड़े फैसले सामूहिक सहमति से लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के फैसले पर अंतिम मुहर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगाते हैं। फैसला किसी को पसंद आए या नहीं, संगठन में उसका पालन करना होता है।
MLC चुनाव में पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ खोला था मोर्चा
अनंत सिंह और जेडीयू के बीच तल्खी की एक बड़ी वजह विधान परिषद चुनाव भी रहा। एमएलसी चुनाव में अनंत सिंह पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ लगातार बयान दे रहे थे। उन्होंने नीरज कुमार को हराने के लिए प्रचार किया और जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया था।
हालांकि, चुनाव परिणाम में नीरज कुमार को जीत मिली। इसके बाद पार्टी ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी को संगठन से निष्कासित कर दिया।
क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड?
यह मामला 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान का है। जेडीयू ने मोकामा सीट से अनंत सिंह को उम्मीदवार बनाया था और उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज की थी। इसी चुनावी माहौल के बीच 30 अक्टूबर को दुलारचंद यादव की हत्या हो गई थी।
दुलारचंद यादव जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। इस हत्याकांड में अनंत सिंह पर आरोप लगे और उन्हें गिरफ्तार किया गया। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। मामले में जांच जारी है और आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच तथा अदालत की प्रक्रिया के आधार पर होगी।