US Airstrikes on Iran: जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए घातक हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान से जुड़े ठिकानों पर हवाई हमले किए गए। अमेरिका का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को जवाब देना और क्षेत्र में अमेरिकी हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर हुई कार्रवाई
CENTCOM के अनुसार, यह सैन्य अभियान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद शुरू किया गया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई का मकसद जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमले का जवाब देना और भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए कड़ा संदेश देना है।अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना इस अभियान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।
जॉर्डन हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत
जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर शुक्रवार को हुए ड्रोन और मिसाइल हमले में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ा। अमेरिकी सेना के अनुसार, इस हमले में दो सैनिकों की मौत, एक सैनिक लापता और चार सैनिक घायल हुए थे। घायल सैनिकों का इलाज अस्पताल में किया गया और बाद में उन्हें छुट्टी दे दी गई। अन्य घायल जवान मामूली उपचार के बाद अपनी ड्यूटी पर लौट चुके हैं।
बढ़ता जा रहा है अमेरिका-ईरान तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव लगातार गंभीर होता जा रहा है। सैन्य आंकड़ों के मुताबिक अब तक इस संघर्ष में 16 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 430 से अधिक जवान घायल हुए हैं। हालांकि, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए CENTCOM ने मारे गए सैनिकों की पहचान और सैन्य अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
ईरान ने अमेरिका को दी कड़ी चेतावनी
अमेरिकी हवाई हमलों के बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी नेतृत्व ने कहा है कि यदि अमेरिका ने हमले जारी रखे तो उसे "अविस्मरणीय जवाब" दिया जाएगा। इसके साथ ही ईरान ने यह भी संकेत दिया कि एक महीने पहले हुए अंतरिम समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को फिलहाल निलंबित किया जा रहा है। ईरानी अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर वाले समझौते को भी अमान्य बताया है।
अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और तेज होती है तो तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और वैश्विक कूटनीतिक संतुलन पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।