चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत बड़ा फैसला सामने आया है। चीनी सैन्य अदालत ने देश के दो पूर्व रक्षा मंत्रियों ली शांगफू और वेई फेंगहे को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। हालांकि अदालत ने दोनों को 2 साल की मोहलत भी दी है। अगर इस अवधि के दौरान दोनों किसी नए अपराध में शामिल नहीं पाए जाते हैं तो उनकी सजा को आजीवन कारावास में बदला जा सकता है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार यह फैसला राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत लिया गया है, जो पिछले कई वर्षों से लगातार जारी है।
read more: LSG ने RCB को 9 रन से हराकर तोड़ी हार की लकीर...
क्या थे आरोप
समाचार एजेंसी एपी और चीनी सरकारी एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व रक्षा मंत्री वेई फेंगहे को रिश्वत लेने का दोषी पाया गया। वहीं ली शांगफू पर रिश्वत लेने और रिश्वत देने दोनों के आरोप साबित हुए। चीन में इस तरह की “सस्पेंडेड डेथ सेंटेंस” आम मानी जाती है। आमतौर पर दो साल तक अच्छा व्यवहार रहने पर सजा को उम्रकैद में बदल दिया जाता है।
शी जिनपिंग का भ्रष्टाचार विरोधी अभियान क्यों चर्चा में
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सत्ता संभालने के बाद चीन में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान शुरू किया था। इस अभियान का उद्देश्य सेना और सरकार में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करना बताया गया था। हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान के जरिए शी जिनपिंग ने अपनी राजनीतिक पकड़ भी मजबूत की है। कई बड़े सैन्य अधिकारियों और नेताओं को हटाया जा चुका है। जनवरी 2026 में चीन के शीर्ष सैन्य नेतृत्व में भी बड़े बदलाव किए गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग में पहले 11 सदस्य थे, लेकिन अब शी जिनपिंग के अलावा केवल एक सदस्य ही बचा है।
read more: IPL 2026 में खिलाड़ियों की सुरक्षा बढ़ी
कौन हैं वेई फेंगहे
वेई फेंगहे ने साल 2018 से 2023 तक चीन के रक्षा मंत्री के रूप में काम किया। उन्हें चीन की सेना में बेहद प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता था। उन पर रक्षा सौदों में रिश्वत लेने के आरोप लगे थे।
ली शांगफू क्यों बने विवादों का केंद्र
वेई फेंगहे के बाद ली शांगफू को रक्षा मंत्री बनाया गया था, लेकिन कुछ महीनों बाद ही वे अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए थे। अक्टूबर 2023 में उन्हें पद से हटा दिया गया। ली शांगफू ने अपने करियर का बड़ा हिस्सा चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की मिसाइल और खरीद शाखा में बिताया। रूसी सैन्य उपकरणों की खरीद के कारण अमेरिका ने उन पर पहले ही यात्रा और वित्तीय प्रतिबंध लगा दिए थे।
चीन की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सख्त कार्रवाइयों से चीन की सेना और राजनीतिक तंत्र में शी जिनपिंग की पकड़ और मजबूत होगी। साथ ही यह संदेश भी दिया गया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं को भी नहीं बख्शा जाएगा। फिलहाल चीन के नए रक्षा मंत्री डोंग जून हैं, लेकिन उन्हें अब तक केंद्रीय सैन्य आयोग में जगह नहीं मिली है, जिससे चीन की सैन्य राजनीति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।