नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े दलबदल के मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पार्टी के 20 कथित बागी सांसदों को नोटिस जारी किया है। सभी सांसदों से सात दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद उठाया गया है। मामला संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून के तहत सांसदों की संभावित अयोग्यता से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट में हुई थी अहम सुनवाई
इस मामले में मंगलवार, 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। सुनवाई TMC सांसद अभिषेक बनर्जी की याचिका पर हुई, जिसमें उन्होंने पार्टी के 20 सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने में कथित देरी को चुनौती दी थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे, ने मामले में संबंधित सांसदों से जवाब मांगा था। अदालत ने स्पीकर के समक्ष लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया था।
स्पीकर की ओर से कोर्ट में दी गई जानकारी
लोकसभा अध्यक्ष और महासचिव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया था कि TMC की ओर से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दायर अयोग्यता याचिकाओं को लेकर संबंधित 20 सांसदों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं। हालांकि, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। अदालत की चिंता इस बात को लेकर थी कि अयोग्यता की पूरी कार्यवाही को उचित और निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए।
TMC ने लगाया पार्टी छोड़ने का आरोप
पूरा विवाद TMC के 20 सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं से जुड़ा है। पार्टी का आरोप है कि इन सांसदों ने पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थाम लिया है। TMC की ओर से इसी आधार पर इन सांसदों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
अभिषेक बनर्जी ने दायर की याचिका
अभिषेक बनर्जी की याचिका में दावा किया गया है कि संबंधित सांसदों का पार्टी छोड़ना और दूसरी राजनीतिक पार्टी में शामिल होना संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का आधार बन सकता है। याचिका में लोकसभा अध्यक्ष और सदन के महासचिव को प्रमुख पक्षकार बनाया गया है। इसके अलावा उन 20 सांसदों को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है, जिनकी लोकसभा सदस्यता खत्म करने की मांग की गई है।
अब 7 दिन में देना होगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद लोकसभा अध्यक्ष की ओर से जारी नोटिस इस मामले में अगला अहम कदम माना जा रहा है। अब 20 सांसदों को नोटिस का जवाब सात दिनों के भीतर देना होगा। इसके बाद उनके जवाब और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी। फिलहाल पूरे मामले की नजर लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष चल रही अयोग्यता कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी पर बनी हुई है।