भाटापारा। ग्राम पंचायत सूरजपुरा के गोठान में मवेशियों की मौत का मामला अब पंचायत सचिव के निलंबन से आगे बढ़कर जवाबदेही को लेकर सवालों में घिर गया है। पंचायत सचिव गंगा डहरिया के निलंबन के बाद पंचायत सचिव संघ उनके समर्थन में सामने आया है। संघ ने अधिकारियों को पत्र सौंपकर निलंबन आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
संघ का कहना है कि गोठान में मवेशियों को ग्रामीणों ने फसल बचाने के उद्देश्य से रखा था और इसमें पंचायत सचिव या सरपंच की कोई भूमिका नहीं थी। संघ के मुताबिक सचिव ने ग्रामीणों को मवेशियों को गोठान में बंद नहीं करने की समझाइश भी दी थी।
संघ के दावे के बाद उठे कई सवाल
पंचायत सचिव संघ के इस पक्ष के बाद मामले में जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। यदि ग्रामीणों को मवेशियों को गोठान में रखने से रोकने के लिए सचिव द्वारा लगातार समझाइश दी गई थी, तो क्या इसकी कोई लिखित सूचना पंचायत या उच्च अधिकारियों को दी गई थी? क्या इस संबंध में कोई शिकायत, पंचनामा या अन्य दस्तावेज तैयार किए गए थे? इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच में सामने आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
20 सितंबर को क्या सामने आया था?
20 सितंबर को मीडिया टीम जब सूरजपुरा के गोठान पहुंची थी, तब सरपंच और पंचायत सचिव से मवेशियों को गोठान में रखे जाने और उनकी मौत के संबंध में जानकारी ली गई थी।
उस दौरान सरपंच ने बताया था कि उन्हें रात में मवेशियों की मौत की जानकारी मिली। वहीं पंचायत सचिव ने कहा था कि सरपंच से जानकारी मिलने के बाद उन्हें घटना का पता चला।
अब पंचायत सचिव संघ की ओर से सचिव को पहले से मवेशियों को गोठान में बंद किए जाने की जानकारी होने और ग्रामीणों को समझाइश देने की बात कही गई है। ऐसे में दोनों बयानों के बीच स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है।
महीनों तक गोठान में कैसे रहे मवेशी?
मामले में दूसरा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि मवेशियों को ग्रामीणों ने गोठान में रखा था और पंचायत की इसमें कोई भूमिका नहीं थी, तो इतनी बड़ी संख्या में मवेशी वहां लंबे समय तक कैसे बने रहे?
इसके साथ ही पानी, चारे और निगरानी की व्यवस्था किसके स्तर पर होनी थी, यह भी जांच का विषय है। यदि किसी स्तर पर समस्या की जानकारी पहले ही मिल गई थी, तो उसके बाद क्या कार्रवाई की गई, इसकी भी पड़ताल जरूरी होगी।
जिम्मेदारी केवल सचिव तक या पूरी व्यवस्था की?
मवेशियों की मौत के मामले में फिलहाल सचिव के निलंबन को लेकर पंचायत सचिव संघ ने आपत्ति जताई है। संघ चाहता है कि निलंबन आदेश पर दोबारा विचार किया जाए।
वहीं पूरे घटनाक्रम की जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि गोठान में मवेशियों को रखने से लेकर उनकी देखभाल और मौत की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने तक किस-किस स्तर पर जिम्मेदारी थी। इससे यह भी तय हो सकेगा कि किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत लापरवाही थी या व्यवस्था के दूसरे स्तरों पर भी जवाबदेही बनती है।
जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगी जिम्मेदारी
पंचायत सचिव संघ ने राजस्व अनुविभागीय अधिकारी और जनपद पंचायत भाटापारा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को पत्र देकर सचिव के निलंबन पर पुनर्विचार की मांग की है। अब प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर सबकी नजर है। जांच में सामने आने वाले दस्तावेज, संबंधित कर्मचारियों के बयान और गोठान में मवेशियों की देखभाल से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मवेशियों की मौत के मामले में वास्तविक जवाबदेही किसकी बनती है।