रायपुर: पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए बिजली से कमाई का रास्ता खुल गया है। यदि उपभोक्ता के घर पर उत्पादित सोलर बिजली उसकी खपत से अधिक होती है, तो यह अतिरिक्त बिजली छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी द्वारा 2.60 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी। इस अतिरिक्त बिजली का वार्षिक लेखा-जोखा किया जाएगा और सरप्लस यूनिट होने पर उपभोक्ता को भुगतान मिलेगा।
पॉवर कंपनी की बिजली क्यों पड़ती है महंगी?
पॉवर कंपनी से मिलने वाली बिजली की औसत कीमत 5 रुपए प्रति यूनिट से कम नहीं बैठती। भले ही शुरुआती 100 यूनिट का टैरिफ 4.10 रुपए हो, लेकिन—
प्रति यूनिट सेस
11 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी
प्रति किलोवाट 20 रुपए का फिक्स चार्ज
एफपीपीएएस शुल्क
जुड़ने के बाद वास्तविक दर 5 रुपए से अधिक हो जाती है। खपत बढ़ने पर बिजली और भी महंगी हो जाती है।
सोलर पैनल पर मिल रही भारी सब्सिडी
सरकार द्वारा सोलर पैनल लगाने पर केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर सहायता दी जा रही है—
3 किलोवाट सोलर सिस्टम की अनुमानित लागत: ₹1.80 लाख
केंद्र सरकार की सब्सिडी: ₹78,000
राज्य सरकार की सहायता: ₹30,000
उपभोक्ता का वास्तविक खर्च: केवल ₹70–72 हजार
कम निवेश में लंबे समय तक मुफ्त बिजली और अतिरिक्त आमदनी संभव हो रही है।
कितनी बिजली बनती है सोलर से?
पॉवर कंपनी के मुताबिक—
1 किलोवाट सोलर पैनल:
रोजाना लगभग 4 यूनिट
महीने में करीब 120 यूनिट
3 किलोवाट सोलर पैनल:
महीने में लगभग 360 यूनिट
इसी वजह से अब कई उपभोक्ता अपनी जरूरत से थोड़ा ज्यादा क्षमता का सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं। कुछ लोग 5 किलोवाट तक का सोलर प्लांट भी लगा रहे हैं।
कम खपत वालों को कैसे होगा फायदा?
यदि किसी उपभोक्ता की मासिक खपत 200 यूनिट है और उसने 3 किलोवाट का सोलर पैनल लगाया है, तो साल भर में करीब 1200 से 1500 यूनिट बिजली अतिरिक्त बच सकती है। इस सरप्लस बिजली पर पॉवर कंपनी 2.60 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से भुगतान करेगी।
हालांकि यह दर बाजार दर से कम है, लेकिन उपभोक्ता को—बिजली बिल में बड़ी राहत, सालाना अतिरिक्त आय, भविष्य में बढ़ते टैरिफ से सुरक्षा जैसे फायदे मिलते हैं।