NEET परीक्षा के परिणाम के बाद मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश और काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान होने वाली धोखाधड़ी से छात्रों को बचाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ के देवराम साहू ने एक AI आधारित एप्लीकेशन विकसित किया है। “डॉक्टर एडमिशन” नामक इस ऐप के जरिए छात्र अपने NEET स्कोर के आधार पर संभावित मेडिकल कॉलेजों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से यह प्लेटफॉर्म छात्रों को उनकी रैंक और अंकों के अनुसार उपयुक्त कॉलेजों का सुझाव देगा।
एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेगी कॉलेज से जुड़ी पूरी जानकारी
एप्लीकेशन में केवल कॉलेजों की सूची ही नहीं, बल्कि संबंधित संस्थानों की फीस, कट-ऑफ, सीटों की उपलब्धता और प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है। छात्र अपने स्कोर के अनुसार देशभर के मेडिकल कॉलेजों की तुलना कर सकते हैं और अपने लिए बेहतर विकल्प चुन सकते हैं। देवराम साहू का कहना है कि वे कई वर्षों से मेडिकल एडमिशन काउंसलिंग से जुड़े रहे हैं और इसी अनुभव के आधार पर इस प्लेटफॉर्म को तैयार किया गया है।
ग्रामीण और छोटे शहरों के छात्रों को होगा लाभ
मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया के दौरान सबसे अधिक परेशानी दूर-दराज और छोटे शहरों के छात्रों को होती है। सही जानकारी के अभाव में उन्हें यह समझने में कठिनाई होती है कि उनकी रैंक पर कौन-सा कॉलेज मिल सकता है या किस संस्थान की फीस कितनी है। ऐसे में यह ऐप छात्रों को विश्वसनीय और व्यवस्थित जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
कॉलेज वेबसाइट तक सीधी पहुंच की सुविधा
“डॉक्टर एडमिशन” एप्लीकेशन में कॉलेज प्रेडिक्टर, फीस प्रेडिक्टर और ऑल इंडिया काउंसलिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी शामिल की गई हैं। यदि किसी छात्र को किसी विशेष कॉलेज के बारे में विस्तृत जानकारी चाहिए, तो वह सीधे उस संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट तक पहुंच सकता है।
काउंसलिंग के दौरान बढ़ जाते हैं ठगी के मामले
NEET रिजल्ट जारी होने के बाद कई एजेंट और फर्जी कंसल्टेंसी छात्रों से संपर्क कर उन्हें सीट दिलाने या मैनेजमेंट कोटा के माध्यम से प्रवेश कराने का दावा करते हैं। कई मामलों में फर्जी अलॉटमेंट लेटर, नकली वेबसाइट, सीट कन्फर्म कराने के नाम पर पैसों की मांग और दस्तावेजों के दुरुपयोग जैसी शिकायतें सामने आती हैं। कुछ लोग NRI और मैनेजमेंट कोटा के नाम पर लाखों रुपये तक वसूलने का प्रयास भी करते हैं।
छात्रों को जागरूक बनाने की पहल
देवराम साहू का मानना है कि सही जानकारी और तकनीक के माध्यम से ऐसे फर्जीवाड़े को काफी हद तक रोका जा सकता है। उनका उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों को मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी सटीक जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे किसी भी तरह की ठगी या भ्रम का शिकार न हों और सही निर्णय ले सकें।