BRICS Summit 2026: इस समय राजधानी दिल्ली में बड़े जोरों शोरों से 12 से 13 सितम्बर के बीच होने वाले 18वें BRICS Summit आयोजन की तैयारी जारी है। इसी बीच आयोजन से पहले आज 11 सितम्बर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं के बीच मुलाकात ऐसे समय पर हुई है। जब जब भारत-रूस के रिश्तों के साथ यूक्रेन युद्ध, वैश्विक तनाव और बदलते कूटनीतिक समीकरणों पर दुनिया की नजर बनी हुई है। करीब 40 मिनट तक चले इस बैठक में दोनों नेताओं के कई बीच बड़े मुद्दों को लेकर चर्चा हुई। जिसके बाद एक ही कार में बैठकर दोनों नेताएं प्रदर्शनी देखने के लिए रवाना हुए.
दो हफ्ते के भीतर दूसरी बार मिले मोदी-पुतिन
गौरतलब है कि दोनों बड़े नेताएं का यह दो सप्ताह के भीतर दूसरी बड़ी मुलाकत है। 11 सितम्बर की मुलाकात से पहले 31 अगस्त को किर्गिस्तान में हुए SCO सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।
भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नया आयाम देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यह बैठक बेहद खास रही। दिल्ली के भारत मंडपम में हुई इस मुलाकात की शुरुआत बेहद गर्मजोशी भरे माहौल में हुई, जहां दोनों शीर्ष नेताओं ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और गले मिलकर आपसी आत्मीयता का परिचय दिया।
मानवीय मूल्यों से जुड़ी 'तिरुक्कुरल' पुस्तक भेंट
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को प्राचीन तमिल ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण उपहार स्वरूप भेंट किया। पुतिन को यह पुस्तक सौंपते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह महान संत तिरुवल्लुवर द्वारा रची गई एक ऐसी कृति है, जो गहरे मानवीय मूल्यों से जुड़ी हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पुस्तक का रूसी अनुवाद दोनों देशों के सांस्कृतिक और आपसी संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नया आयाम देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक समाप्त हुई। वैश्विक पटल पर रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका जैसे बड़े संघर्षों के बीच हुई इस उच्चस्तरीय चर्चा पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी थीं। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है।
2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
दोनों देशों के बीच हुए समझौतों और रणनीतिक वार्ताओं के मुताबिक, वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़े को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। इस बड़े टारगेट को हासिल करने के लिए दोनों सरकारें आपसी आर्थिक सहयोग के दायरे को लगातार बढ़ा रही हैं, ताकि व्यापारिक गतिविधियों में तेज इजाफा दर्ज किया जा सके।
इस व्यापारिक लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहा जा रहा है, बल्कि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूत किया जा रहा है। भारत और रूस के बीच आर्थिक साझेदारी को गति देने के लिए स्टील वैल्यू चेन को मजबूती से विकसित करने पर खास ध्यान दिया जा रहा है।नए लॉजिस्टिक रूट व्यापारिक आवाजाही को अधिक सुगम, तेज और किफायती बनाने के लिए नए परिवहन और लॉजिस्टिक रूट्स की तलाश और उनका विकास किया जा रहा है, जिससे आयात-निर्यात से जुड़ी बाधाएं कम हों।
कूटनीति और वैश्विक संघर्षों पर चर्चा
वर्तमान में दुनिया दो बड़े युद्धों—रूस-यूक्रेन और ईरान-US—का सामना कर रही है, ऐसे में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच इन वैश्विक परिस्थितियों और बदलते रणनीतिक समीकरणों पर विस्तार से मंथन हुआ। भारत का रुख हमेशा से संवाद और कूटनीति के पक्ष में रहा है। इससे पहले 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान भी पीएम मोदी ने पुतिन से मुलाकात की थी। उस दौरान प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया था कि युद्ध का प्रत्येक दिन मानवता को पीछे धकेलता है और संघर्ष से हटकर शांति के मार्ग पर लौटने की आवश्यकता है।
रक्षा और विमानन क्षेत्र में बड़े समझौते
दोनों देशों की इस बैठक से पहले रूस के राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता ने जानकारी दी थी कि पुतिन के एजेंडे में भारत को Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट उपलब्ध कराने का विषय भी शामिल है। पांचवीं पीढ़ी का यह लड़ाकू विमान एडवांस्ड स्टेल्थ तकनीक से लैस है, और रूस भारत के साथ अपनी रक्षा साझेदारी को और अधिक व्यापक बनाना चाहता है।
इसके अतिरिक्त, विमानन क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए रूस भारत को 105 IL-114-300 सिविल विमानों की आपूर्ति के लिए सहमत हो गया है। रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (UAC) ने भारत मंडपम में आयोजित INNOPROM प्रदर्शनी के दौरान क्षेत्रीय टर्बोप्रॉप विमान IL-114-300 की सप्लाई को लेकर भारतीय कंपनियों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस डील के तहत पिनेकल एयर को 50 और एयर केरल को 20 यूनिट तक विमान मिलेंगे।
ऊर्जा व्यापार और वित्तीय विकल्प
अमेरिकी प्रतिबंधों और डॉलर के दबाव के बावजूद भारत और रूस के बीच ऊर्जा का कारोबार निरंतर जारी है। दोनों राष्ट्रों के द्विपक्षीय व्यापार का अधिकांश हिस्सा अब रूबल और रुपये के माध्यम से संचालित होता है, जिससे रूस ने अमेरिकी दबाव के बीच एक नया आर्थिक विकल्प तैयार कर लिया है। हालांकि, रूस का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर डॉलर को समाप्त करना नहीं, बल्कि भुगतान के वैकल्पिक साधनों का विस्तार करना है। प्रतिबंधों के इन तमाम बाधाओं के पार भी भारतीय ऊर्जा बाजार में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है; जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल क्रूड ऑयल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी बढ़कर 50.83 फीसदी यानी लगभग 24.7 लाख बैरल प्रतिदिन दर्ज की गई। इसके साथ ही व्यापार, परमाणु ऊर्जा, आर्थिक सहयोग और परिवहन जैसे अन्य अहम विषयों पर भी दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक चर्चा हुई।
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