भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने मेधावी विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य की लैपटॉप योजना के तहत 1 लाख 21 हजार 804 विद्यार्थियों के बैंक खातों में 25-25 हजार रुपए की राशि ट्रांसफर की गई है। यह राशि विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने में आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से प्रदान की जा रही है। भोपाल में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रतीकात्मक रूप से 10 विद्यार्थियों को लैपटॉप भी सौंपे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छात्रों को केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाने तक सीमित न रहने, बल्कि जीवन की हर परिस्थिति से सीखने का संदेश दिया।
सफलता को सिर पर न चढ़ाएं, असफलता से सीखें
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विद्यार्थियों से कहा कि अच्छे अंक और उपलब्धियां जीवन में महत्वपूर्ण जरूर हैं, लेकिन सफलता के कारण अहंकार नहीं आना चाहिए। वहीं, यदि किसी प्रयास में असफलता मिलती है तो उससे निराश होने के बजाय अपनी कमियों को पहचानकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और कठिन परिस्थितियों से डरने के बजाय उनका सामना करने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में केवल किताबों की पढ़ाई पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ अपनी स्किल्स विकसित करने पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सीखने की प्रक्रिया जितनी मजबूत होगी, भविष्य में आगे बढ़ने के अवसर भी उतने ही बेहतर होंगे।
473 विद्यार्थियों से शुरू हुआ था योजना का सफर
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश में मेधावी विद्यार्थियों के लिए लैपटॉप सहायता योजना की शुरुआत सीमित संख्या में छात्रों के साथ हुई थी। शुरुआती दौर में इस योजना का लाभ केवल 473 विद्यार्थियों को मिला था। समय के साथ योजना का विस्तार होता गया और अब एक ही चरण में 1 लाख 21 हजार 804 से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ दिया जा रहा है। पात्र विद्यार्थियों को सरकार की ओर से 25 हजार रुपए की सहायता दी जाती है, जिससे वे अपनी जरूरत के अनुसार लैपटॉप खरीद सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि लैपटॉप को केवल एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह विद्यार्थियों के लिए डिजिटल पढ़ाई, ऑनलाइन कोर्स, ई-लाइब्रेरी और उच्च शिक्षा से जुड़े संसाधनों तक पहुंच बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
कठिनाइयां ही बनाती हैं मजबूत
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को जीवन के संघर्षों का महत्व भी समझाया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे पत्थर लगातार चोट सहने के बाद एक सुंदर मूर्ति का रूप ले सकता है, उसी तरह जीवन की चुनौतियां व्यक्ति को मजबूत और परिपक्व बनाती हैं। उन्होंने खेल का उदाहरण देते हुए कहा कि मैदान में उतरने वाला खिलाड़ी ही जीत और हार दोनों का अनुभव करता है। इसलिए युवाओं को चुनौतियों से दूर भागने के बजाय उनका सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
छात्रों ने साझा किए भविष्य के सपने
कार्यक्रम में कई मेधावी विद्यार्थियों ने अपने भविष्य के लक्ष्य भी साझा किए।12वीं की परीक्षा में 97.2 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले धीरेंद्र सिंह मुंडेला ने बताया कि वह आगे चलकर UPSC की तैयारी करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा के माध्यम से देश के लिए काम करना है और भविष्य में सार्वजनिक जीवन में योगदान देने की भी उनकी इच्छा है। वहीं, 95 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाली हिमांशी पाठक ने उद्यमी बनने का लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि वह अपने करियर में अनुभव हासिल करने के बाद भविष्य में अपना व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं।
अब तक करीब 6 लाख विद्यार्थियों को मिल चुका लाभ
स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया कि योजना की शुरुआत से अब तक लगभग 6 लाख विद्यार्थी इसका लाभ प्राप्त कर चुके हैं। सरकार इस योजना पर अब तक करीब 1620 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। यह योजना वर्ष 2009-10 में शुरू की गई थी। शुरुआती समय में योजना का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों के लिए 85 प्रतिशत अंक की पात्रता रखी गई थी, जिसे बाद में घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया। मंत्री ने बताया कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि देखने को मिली है और स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या में कमी आई है। इसके साथ ही शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में रिक्त शिक्षक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी भी की जा रही है।
डिजिटल शिक्षा की दिशा में बड़ी पहल
मध्यप्रदेश सरकार की लैपटॉप सहायता योजना मेधावी विद्यार्थियों को तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। डिजिटल संसाधनों की बढ़ती जरूरत के बीच लैपटॉप विद्यार्थियों को पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और नई स्किल्स सीखने में मदद कर सकता है। 1 लाख से अधिक विद्यार्थियों को एक साथ आर्थिक सहायता मिलने से बड़ी संख्या में छात्रों को अपनी पढ़ाई और करियर की तैयारी के लिए तकनीकी संसाधन उपलब्ध होने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक शिक्षा और डिजिटल अवसरों के लिए तैयार करना भी है।