राकेश कानूनगो, नागदा: कर्नाटक के राज्यपाल डॉ. थावरचंद गेहलोत के पोते व निजी अस्पताल संचालक मनीष गेहलोत के खिलाफ स्वास्थय विभाग के बीएमओ डॉ. शिवराज कौशल ने बिरलाग्राम थाने में लिखित शिकायत का आवेदन बुधवार को दिया है। जिसमें उन्होंने सरकारी अस्पताल से सीएम हेल्पलाइन डेटा वाला सीपीयू जबरन ले जाने और रोकने पर मारपीट करने सहित पत्नी को उठाने तक की धमकी देने का आरोप लगाया है। बीएमओ ने बकायदा आवेदन देकर शासकीय कार्य बाधा, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने पर प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।
सीसीटीवी में सीपीयू ले जाते तस्वीर कैद
बीएमओ डॉ. कौशल ने शिकायत में बताया कि 25 मार्च 2026 को दोपहर 3 से 4 बजे के बीच मनीष गेहलोत 4-5 साथियों के साथ सरकारी अस्पताल में जबरन पहुंचे और विभागीय कम्प्यूटर का सीपीयू कक्ष से उठाकर ले गया। जब उसे रोकने का प्रयास किया तो मनीष ने डॉ. कौशल के साथ मारपीट की। साथ ही उन्हें, उनके परिवार को जान से मारने और पत्नी को उठवाने तक की धमकी दी। बुधवार को डॉ. कौशल द्वारा दिया गया शिकायती पत्र सोशल मीडिया पर भी सामने आया, जिसमें मनीष गेहलोत के खिलाफ कई गंभीर आरोप दर्ज हैं।
बना रहे थे दबाव
आवेदन में आरोप लगाया गया कि मनीष गेहलोत अविघ्न हॉस्पिटल का संचालन करते है। शासकीय अस्पताल के मरीजों और प्रसूताओं को आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से अपने अस्पताल में रेफर कराने का दबाव बना रहे थे। इसके साथ ही उनके अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक और हौम्योपैथिक शासकीय मान्यता प्राप्त निजी क्लीनिकों पर कार्रवाई कर उन्हें बंद कराने का भी दबाव बनाया जा रहा था। यह दबाव कई दिनों से बना रहे थे, इस वजह से बीएमओ ने खुद को मानसिक रुप से परेशान होना भी बताया। डॉ. कौशल के मुताबिक उन्होंने दबाव में काम नहीं किया तो दुर्भावना रख इस घटना को अंजाम दिया।
बीएमओ ने की सुरक्षा की मांग
बीएमओ ने शिकायत में कहा कि सरकारी अस्पताल परिसर में जबरन घुसपैठ, शासकीय कम्प्यूटर सीपीयू ले जाना, मारपीट और धमकी देना संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। मामले में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई और सुरक्षा देने की मांग की गई है। मामले में शिकायत करने वाले डॉ. शिवराज कौशल ने संपर्क करने पर वह बोले कि अभी मीटिंग में है।
उठते सवाल...
सवाल यह है कि जो पुलिस खुद के साथ बदसलूकी पर मौन रही। वह बीएमओ के आवेदन पर एफआईआर दर्ज कर पाएगी। क्योंकि यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी कर्नाटक राज्यपाल डॉ. गेहलोत के एक पोते ने प्रतिमा विसर्जन के दौरान महिला एसआई से बदलसूकी थी। बकायदा रोजनामचे में घटना का विवरण तक दर्ज हुआ था, परंतु पुलिस कोई कार्रवाई नही कर पाई। इसके अलावा मनीष गेहलोत का नाम सुर्खियों में तब भी आया था, जब ग्रेसिम के गेट पर उन्होंने अपनी कार खड़ी कर दी थी। हालांकि तब भी मामले को दबा दिया गया था। ऐसे में पुलिस क्या कार्रवाई करती है, यह बड़ा सवाल रहेगा।
आवेदन मिला है, जांच कर रहे है..
मामले में बिरलाग्राम थाना प्रभारी जितेंद्र पाटीदार ने बताया कि बीएमओ डॉ. शिवराज कौशल ने आवेदन दिया है। जिसमें सरकारी अस्पताल से जबरन सीपीयू ले जाने, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही आगे कार्रवाई की जाएगी।