नई दिल्ली। देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। दिल्ली एयरपोर्ट का एक प्रमुख रनवे 16 फरवरी 2026 से अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा। हालांकि एयरपोर्ट प्रशासन का दावा है कि इससे उड़ानों के संचालन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। दिल्ली एयरपोर्ट पर कुल चार रनवे हैं। इनमें से रनवे 11R/29L, जिसे वर्ष 2008 में तैयार किया गया था, अब बड़े स्तर के मेंटेनेंस और तकनीकी अपग्रेड के लिए बंद किया जा रहा है। एयरपोर्ट संचालक कंपनी दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) के अनुसार, यह रनवे करीब 4 से 5 महीने तक बंद रहेगा।
रनवे पर क्या होगा काम?
डायल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस अवधि में रनवे की पुरानी सतह को पूरी तरह हटाकर नई एस्फाल्ट लेयर बिछाई जाएगी। इसके साथ ही नया रैपिड एग्जिट टैक्सीवे तैयार किया जाएगा, आधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) लगाया जाएगा, रनवे की सुरक्षा और ऑपरेशनल क्षमता को बेहतर किया जाएगा, जुलाई 2026 की शुरुआत में डीजीसीए (DGCA) से मंजूरी मिलने के बाद रनवे को फिर से चालू करने की योजना है।
क्या उड़ानों पर पड़ेगा असर?
डायल का कहना है कि रनवे बंद होने के बावजूद दिल्ली एयरपोर्ट की दैनिक उड़ान क्षमता पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। फिलहाल एयरपोर्ट प्रतिदिन लगभग 1,514 उड़ानों का संचालन करता है और अन्य तीन रनवे की मदद से इस संख्या को बनाए रखा जाएगा। हालांकि, पीक आवर्स में कुछ उड़ानों में मामूली देरी संभव है। यह समय कोहरे के मौसम के खत्म होने और गर्मियों की छुट्टियों की शुरुआत का होगा, जब यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। पिछले वर्ष रनवे बंदी के दौरान कुछ दिक्कतें सामने आई थीं, लेकिन इस बार एयरलाइंस और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के साथ पहले से बेहतर प्लानिंग की गई है।
यात्रियों के लिए जरूरी सलाह:
यदि आप फरवरी से जुलाई 2026 के बीच दिल्ली एयरपोर्ट से यात्रा करने वाले हैं, तो अपनी फ्लाइट का स्टेटस पहले से चेक करें, एयरपोर्ट समय से पहले पहुंचें, एयरलाइन द्वारा जारी अपडेट पर नजर रखें, डायल ने सभी संबंधित एजेंसियों और एयरलाइंस के साथ समन्वय कर लिया है ताकि यात्रियों को न्यूनतम असुविधा हो।
क्यों जरूरी है यह अपग्रेड?
एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, यह अपग्रेड भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इससे न केवल उड़ानों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में बढ़ने वाले यात्री भार को संभालने में भी मदद मिलेगी।