रायपुर: छत्तीसगढ़ में जमीन-जायदाद की गाइडलाइन दरों में हालिया संशोधन का सीधा असर रजिस्ट्री और सरकारी राजस्व पर पड़ा है। दरों में वृद्धि के बाद पंजीयन शुल्क बढ़ने से आम लोगों की रफ्तार धीमी हुई और वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में राज्य को मिलने वाले राजस्व में गिरावट दर्ज की गई। 1 अप्रैल 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच पंजीयन विभाग को कुल 1960.05 करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 2978.58 करोड़ रुपये रहा था। तुलना करने पर लगभग 4.10 प्रतिशत की कमी सामने आई है।
दस्तावेजों की संख्या में भी गिरावट:
राजस्व के साथ-साथ पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। चालू वित्तीय वर्ष में 31 दिसंबर तक 2.04 लाख दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 3.21 लाख थी। इस प्रकार करीब 10.20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। बीते एक दशक में पहली बार पंजीयन संख्या में इतनी बड़ी कमी देखने को मिली है।
क्यों जरूरी हुआ गाइडलाइन दरों का संशोधन?
राज्य सरकार ने लगभग सात-आठ वर्षों बाद गाइडलाइन दरों में बदलाव किया। वर्ष 2018-19 की दरें ही प्रभावी थीं, जबकि इस दौरान बाजार मूल्य, शहरी विस्तार, विकास गतिविधियों और जमीनों के उपयोग में बड़े बदलाव आ चुके थे। मार्केट रेट और गाइडलाइन रेट के बीच बढ़ते अंतर के कारण वास्तविक सौदे की राशि छिपाकर “कच्चे” लेन-देन की आशंका बढ़ गई थी। ग्रामीण क्षेत्रों में हेक्टेयर दर और छोटे भूखंडों की वर्गमीटर दरों में असमानता के चलते बड़े भूखंडों को छोटे हिस्सों में बांटकर अधिक मुआवजा लेने जैसे मामले भी सामने आ रहे थे। इन विसंगतियों को दूर करने के उद्देश्य से 20 नवंबर 2025 से नई गाइडलाइन दरें लागू की गईं और कई अनावश्यक प्रावधानों में संशोधन किया गया।
अब मार्च से उम्मीदें:
पंजीयन विभाग से जुड़े सूत्रों का मानना है कि वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना मार्च निर्णायक साबित हो सकता है। नई दरों में किए गए सुधार और प्रावधानों के युक्तियुक्तकरण के बाद रजिस्ट्री की रफ्तार तेज होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि जनवरी और फरवरी 2026 के आंकड़े अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं, लेकिन विभाग को उम्मीद है कि अंतिम माह में बढ़ती रजिस्ट्री से अब तक की राजस्व कमी काफी हद तक पूरी की जा सकती है।