भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि सरकार का कहना है कि चीनी के दाम बढ़ने के पीछे सिर्फ इथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ती मांग, खराब मौसम और वैश्विक स्तर पर सप्लाई में दबाव जैसे कई कारण एक साथ सामने आ रहे हैं। खास बात यह है कि चीनी की कीमतों में तेजी का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में भी उत्पादन और आपूर्ति को लेकर चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में ग्लोबल शुगर मार्केट पर दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारत में अनुमान से कम रह सकता है चीनी उत्पादन
भारत में मौजूदा सीजन के दौरान चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा गन्ना उत्पादक राज्यों के शुरुआती अनुमान करीब 343 LMT से काफी कम है। गन्ने की फसल को रेड रॉट यानी लाल सड़न और टॉप बोरर जैसे रोगों से नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा समय से पहले हुई अधिक बारिश और जलभराव ने भी कई क्षेत्रों में गन्ने की फसल को प्रभावित किया है। दूसरी ओर, त्योहारों के नजदीक आने के साथ घरेलू बाजार में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है। यही वजह है कि कम उत्पादन और बढ़ती मांग के बीच कीमतों पर दबाव दिखाई दे रहा है। हालांकि सरकार का कहना है कि उत्पादन अनुमान से कम रहने के बावजूद देश में पर्याप्त चीनी का स्टॉक मौजूद है। यह भंडार अक्टूबर में नए पेराई सीजन के शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
दुनिया में भी चीनी की कीमतों पर दबाव
ग्लोबल मार्केट में भी चीनी की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है। दुनिया के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक देशों में शामिल ब्राजील की भूमिका इस पूरे संकट में काफी अहम है उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक ब्राजील दुनिया के कुल गन्ना उत्पादन में करीब 24 फीसदी हिस्सेदारी रखता है, जबकि भारत की हिस्सेदारी लगभग 16 फीसदी बताई जाती है। ऐसे में ब्राजील के उत्पादन और निर्यात से जुड़े फैसलों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय चीनी बाजार पर पड़ सकता है।
ब्राजील में चीनी की जगह इथेनॉल पर बढ़ रहा जोर
ब्राजील में गन्ने का एक बड़ा हिस्सा चीनी के साथ-साथ इथेनॉल उत्पादन में भी इस्तेमाल होता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और ईंधन की मांग के बीच गन्ने को इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने का रुझान बढ़ा है। ब्राजील की नेशनल सप्लाई कंपनी कोनाब के अनुमानों के अनुसार, देश के चीनी उत्पादन में करीब 3 फीसदी की कमी आ सकती है। इसके अलावा मौसम संबंधी परिस्थितियों ने भी ब्राजील की गन्ने की फसल पर असर डाला है। यदि ब्राजील में चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा घटती है, तो इसका असर वैश्विक निर्यात बाजार पर पड़ना स्वाभाविक है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की भविष्य की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है।
अल नीनो ने बढ़ाई मुश्किल
चीनी संकट की दूसरी बड़ी वजह मौसम को माना जा रहा है। अल नीनो की स्थिति का असर दुनिया के कई प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।ब्राजील के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में बारिश में देरी और तापमान बढ़ने से गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ने की बात सामने आई है। भारत और थाईलैंड जैसे अन्य प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में भी मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं। थाईलैंड दुनिया के कुल गन्ना उत्पादन में करीब 6 फीसदी योगदान देता है। ऐसे में वहां मौसम खराब रहने पर वैश्विक चीनी सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
2026/27 में वैश्विक चीनी घाटे की आशंका
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी वायदा कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। अमेरिकी कमोडिटी बाजार में चीनी वायदा कीमतें 17 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर कारोबार करती बताई गई हैं और मई 2025 के बाद के ऊंचे स्तरों के करीब बनी हुई हैं। बाजार विश्लेषकों ने 2026/27 में वैश्विक चीनी घाटे के अनुमान को बढ़ाया है। इसके पीछे कम उत्पादन, मौसम संबंधी जोखिम और प्रमुख उत्पादक देशों में खेती के रकबे से जुड़ी चुनौतियां बताई जा रही हैं। यदि गन्ने और चुकंदर की बुवाई में कमी आती है, तो 2027/28 में वैश्विक चीनी बाजार में सप्लाई का दबाव और बढ़ सकता है।
आखिर ब्राजील इथेनॉल की ओर क्यों बढ़ रहा है?
ब्राजील के लिए इथेनॉल एक महत्वपूर्ण ईंधन विकल्प है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और घरेलू ईंधन जरूरतें गन्ने को चीनी की बजाय इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने को प्रोत्साहित कर रही हैं। ब्राजील ने जुलाई के अंत में अनिवार्य इथेनॉल मिश्रण की दर बढ़ाकर 32 फीसदी कर दी, जो इससे एक महीने पहले 30 फीसदी और एक साल पहले 27 फीसदी थी। इस बदलाव का मतलब है कि गन्ने की अधिक मात्रा इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हो सकती है। अगर चीनी उत्पादन के लिए गन्ने की उपलब्धता घटती है तो वैश्विक बाजार में सप्लाई पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
भारत समेत किन देशों पर सबसे ज्यादा असर?
भारत, यूरोपीय संघ और थाईलैंड को प्रतिकूल मौसम के प्रति संवेदनशील प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्रों में माना जा रहा है। इन देशों में उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल भारत सरकार घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त स्टॉक होने की बात कह रही है, लेकिन वैश्विक बाजार में उत्पादन और मौसम से जुड़े जोखिमों पर नजर बनी हुई है।