राजा शर्मा//डोंगरगढ़: छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में नवरात्र की पंचमी पर आस्था, परंपरा और आदिवासी संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। विश्वप्रसिद्ध मां बम्लेश्वरी धाम में राजपरिवार की अगुवाई में आदिवासी समाज ने पारंपरिक पंचमी भेंट की रस्म निभाई। इस दौरान मां बम्लेश्वरी देवी और आंगा देव का मिलन कराया गया। मान्यता है कि इस परंपरा के माध्यम से क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है।
पंचमी भेंट का आयोजन इस बार खास रहा, क्योंकि पिछले कुछ समय से इस परंपरा को लेकर तनाव और मतभेद की स्थिति सामने आई थी। हालांकि, मंदिर ट्रस्ट समिति, राजपरिवार, आदिवासी समाज और प्रशासन के बीच समन्वय के बाद यह पारंपरिक रस्म संपन्न हुई।
आस्था और आदिवासी संस्कृति का संगम
डोंगरगढ़ की पंचमी भेंट धार्मिक आस्था के साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ी हुई है। मां बम्लेश्वरी के दरबार में आयोजित इस रस्म के दौरान आदिवासी समाज की लोक मान्यताओं और वर्षों पुरानी परंपराओं की झलक देखने को मिली।
राजपरिवार की अगुवाई में आयोजित कार्यक्रम में आंगा देव और मां बम्लेश्वरी देवी के मिलन की परंपरा निभाई गई। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस आयोजन के जरिए क्षेत्र की सुख-शांति और जनकल्याण की कामना की जाती है। यह परंपरा डोंगरगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
पंचमी भेंट में राजपरिवार की अहम भूमिका
पंचमी भेंट केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि डोंगरगढ़ की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी परंपरा भी है। इसके निर्वहन में राजपरिवार की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस आयोजन के माध्यम से आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान को भी सम्मान मिलता है।
इस बार विभिन्न पक्षों के बीच समन्वय स्थापित होने के बाद परंपरा के अनुसार रस्म पूरी की गई। आयोजन में राजपरिवार और आदिवासी समाज की सहभागिता ने इस परंपरा के महत्व को एक बार फिर सामने रखा।
तनाव के बीच प्रशासन की मौजूदगी में संपन्न हुआ आयोजन
पंचमी भेंट को लेकर पिछले कुछ समय से सामने आए मतभेदों के कारण इस बार प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। मंदिर ट्रस्ट समिति, राजपरिवार और आदिवासी समाज के बीच समन्वय के साथ कार्यक्रम संपन्न कराया गया।
धार्मिक आयोजनों के दौरान शांति, आपसी सौहार्द और सामाजिक समरसता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल रहता है। ऐसे में आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की मौजूदगी अहम रही।
सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश
डोंगरगढ़ की पंचमी भेंट ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी परंपराओं की विशिष्ट पहचान को सामने रखा। मां बम्लेश्वरी देवी और आंगा देव के मिलन की यह रस्म स्थानीय आस्था के साथ ऐतिहासिक परंपराओं को सहेजने का माध्यम भी है।
विभिन्न पक्षों के समन्वय से आयोजन संपन्न होने के साथ यह संदेश भी सामने आया कि आपसी संवाद और सहयोग के जरिए सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित रखा जा सकता है। पंचमी भेंट जैसी परंपराएं नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।