रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला घोटाले में जांच एजेंसियों ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबित आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई की करीब 4 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। यह कार्रवाई इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा की गई है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जांच के दौरान विश्नोई से जुड़ी 9 अचल संपत्तियों की पहचान की गई, जिनकी कुल कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये आंकी गई है। इन संपत्तियों को कथित तौर पर अवैध तरीके से अर्जित किया गया था।
कैसे हुई कार्रवाई?
EOW ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में जुलाई 2024 में केस दर्ज किया था। इसके बाद विस्तृत जांच के दौरान संपत्तियों के दस्तावेज और लेन-देन की जांच की गई।
एजेंसी ने इन संपत्तियों को जब्त करने के लिए रायपुर की स्पेशल कोर्ट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आवेदन प्रस्तुत किया। 17 अप्रैल को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी चिन्हित संपत्तियों को जब्त करने का आदेश जारी कर दिया।
अब संपत्तियों पर क्या असर पड़ेगा?
जब्ती के बाद अब इन संपत्तियों को न तो बेचा जा सकता है और न ही किसी अन्य के नाम ट्रांसफर किया जा सकता है। ये पूरी तरह से जांच एजेंसियों के नियंत्रण में रहेंगी।
ED भी कर चुका है कार्रवाई
इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इसी मामले में विश्नोई से जुड़ी 5 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया था।
अन्य अधिकारियों पर भी शिकंजा
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में अन्य सरकारी अधिकारियों और संबंधित लोगों पर भी कार्रवाई जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़ी अधिकारी सौम्या चौरसिया की संपत्तियों पर भी पिछले साल कार्रवाई की जा चुकी है।
क्या है पूरा कोयला घोटाला?
यह मामला जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच हुए करीब 540 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि राज्य में कोयला परिवहन के दौरान प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली की जा रही थी। इस कथित सिंडिकेट में अफसर, कारोबारी, नेता और बिचौलियों की मिलीभगत सामने आई है।
गिरफ्तारी और जमानत
2009 बैच के IAS अधिकारी समीर विश्नोई को इस मामले में ED ने साल 2022 में गिरफ्तार किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें और अन्य आरोपियों को जमानत मिल गई थी