अंबिकापुर कलेक्ट्रेट में क्लर्क के पद पर रह चुके ऋषि सिंह को आय से अधिक संपत्ति के मामले में विशेष सत्र न्यायालय ने 4 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। भ्रष्टाचार से जुड़े इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच में उनकी संपत्ति वैध आय की तुलना में करीब 1049 गुना अधिक पाई गई थी।
अदालत में सुनवाई के दौरान ऋषि सिंह अपनी कथित बेहिसाब संपत्ति और उसके स्रोत को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। मामले में कोर्ट ने उनकी सभी जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं।
2013 में ACB ने घर पर मारा था छापा
मामला वर्ष 2013 का है। एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर ने अंबिकापुर कलेक्ट्रेट में पदस्थ क्लर्क ऋषि सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का प्रकरण दर्ज किया था। इसके बाद 18 जून 2013 को ACB की टीम ने उनके केदारपुर स्थित आवास पर छापा मारा।
छापे के दौरान जांच एजेंसी को बड़ी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिले थे। ACB ने इन सामानों और संपत्तियों को जांच के दायरे में लेते हुए उनकी कुल संपत्ति और वैध आय का आकलन किया।
घर से 14.12 लाख रुपये नकद मिले
ACB की कार्रवाई के दौरान ऋषि सिंह के घर से 14 लाख 12 हजार रुपये नकद बरामद किए गए थे। इसके अलावा लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवर भी जांच एजेंसी ने जब्त किए।
जांच में ऋषि सिंह के नाम पर कई अचल संपत्तियां होने की जानकारी भी सामने आई। ACB के आकलन में उनकी कुल संपत्ति उनकी ज्ञात वैध आय से करीब 1049 गुना अधिक पाई गई।
संपत्ति के स्रोत का जवाब नहीं दे सके
मामले की न्यायिक सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आय और संपत्ति के बीच बड़े अंतर को अदालत के सामने रखा। आरोपी क्लर्क अपनी संपत्तियों और बरामद रकम के वैध स्रोत को लेकर अदालत को संतोषजनक जानकारी नहीं दे सके। मामले में ACB ने जांच पूरी करने के बाद वर्ष 2018 में विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में अभियोग पत्र पेश किया था।
कोर्ट ने सुनाई 4 साल की सजा
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद विशेष सत्र न्यायालय ने ऋषि सिंह को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उनकी सभी जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं।
यह मामला सरकारी पद पर रहते हुए कथित तौर पर अर्जित बेहिसाब संपत्ति और उसकी वैध आय के बीच बड़े अंतर से जुड़ा है। अदालत के फैसले के बाद भ्रष्टाचार के मामलों में सरकारी कर्मचारियों की अवैध संपत्ति पर कार्रवाई को लेकर यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।