रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC Scam मामले में जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जेल में बंद पूर्व सीजीपीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को इलाज के लिए रायपुर के मेकाहारा अस्पताल लाए जाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल परिसर का एक वीडियो सामने आने के बाद जेल विभाग ने मामले की जांच कराई और ड्यूटी में लापरवाही के लिए तीन जेल प्रहरियों को जिम्मेदार माना गया।
जांच के बाद बलौदाबाजार जिला जेल में पदस्थ प्रहरी संदीप कुमार माहेश्वरी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं दंतेवाड़ा के प्रहरी नागेन्द्र कुमार महतो और रायगढ़ के प्रहरी पवन कुमार लहरे के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है।
मेकाहारा में इलाज के दौरान सामने आया वीडियो
टामन सोनवानी को स्वास्थ्य संबंधी जांच और उपचार के लिए रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) लाया गया था। इसी दौरान अस्पताल परिसर में उनका एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह अपने परिजनों के साथ बातचीत करते नजर आए।
वीडियो में सोनवानी के बिना हथकड़ी दिखाई देने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे। मामले के सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने ड्यूटी पर तैनात प्रहरियों की भूमिका की जांच शुरू की। अन्य मीडिया रिपोर्टों में भी वीडियो के आधार पर अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने की बात सामने आई है।
हरिभूमि-आईएनएच के स्टिंग के बाद मामला चर्चा में
इस पूरे मामले में हरिभूमि-आईएनएच द्वारा तैयार किए गए स्टिंग वीडियो के सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया। वीडियो में विचाराधीन बंदी टामन सोनवानी को अस्पताल परिसर में अपनी पत्नी और एक अन्य व्यक्ति के साथ बातचीत करते हुए देखा गया।
मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ा क्योंकि विचाराधीन बंदी की सुरक्षा और निगरानी में तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर विभागीय स्तर पर स्पष्ट निर्देश होने की बात सामने आई थी।
तीन जेल प्रहरियों की भूमिका पर उठे सवाल
मामले की प्रारंभिक जांच के बाद ड्यूटी पर तैनात तीन प्रहरियों की भूमिका को लापरवाहीपूर्ण माना गया। इनमें शामिल हैं—
- संदीप कुमार माहेश्वरी — जिला जेल बलौदाबाजार
- नागेन्द्र कुमार महतो — जिला जेल दंतेवाड़ा
- पवन कुमार लहरे — जिला जेल रायगढ़
जांच के बाद संदीप कुमार माहेश्वरी के खिलाफ सबसे सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से पदच्युत कर दिया गया। अन्य दो प्रहरियों के खिलाफ भी विभागीय स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
जेल प्रशासन ने क्यों की सख्त कार्रवाई?
जेल प्रशासन के मुताबिक, संवेदनशील बंदियों की सुरक्षा और निगरानी में तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में ड्यूटी के दौरान लापरवाही को गंभीर अनुशासनहीनता माना गया। विभागीय आदेश में कार्रवाई के पीछे जेल नियमों के उल्लंघन और गंभीर कदाचार को आधार बनाया गया है। इसी के चलते संदीप कुमार माहेश्वरी को 29 सितंबर 2026 से सेवा से पदच्युत किए जाने की कार्रवाई की गई।
CGPSC मामले में पहले से जेल में हैं टामन सोनवानी
टामन सिंह सोनवानी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले में जेल में हैं। जुलाई 2026 में ईडी ने भी उन्हें मामले में गिरफ्तार किया था। वहीं सितंबर 2026 में ईडी ने टामन सिंह सोनवानी समेत तीन आरोपियों के खिलाफ रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में करीब 3,700 पन्नों की अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद अब जेल विभाग की निगरानी व्यवस्था और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।