भोपाल। BRICS Cultural Summit 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल बुधवार से वैश्विक सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बन गई है। यहां BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ, जो 8 अगस्त तक चलेगा। सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य एवं भागीदार देशों के 100 से अधिक विदेशी प्रतिनिधि, संस्कृति मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत फोटो सेशन के साथ हुई, जिसके बाद विभिन्न विषयों पर उच्चस्तरीय बैठकों का दौर शुरू हुआ। सम्मेलन का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग, विरासत संरक्षण और जन-जन के बीच संबंधों को मजबूत करना है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होंगे विदेशी मेहमान
सम्मेलन परिसर में ‘ज्ञान भारतम’, ‘प्रोजेक्ट मौसम’ और ‘प्रोजेक्ट बृहत्तर भारत’ विषयों पर विशेष प्रदर्शनियां लगाई गई हैं। इन प्रदर्शनों के माध्यम से भारत की प्राचीन पांडुलिपियों, समुद्री सांस्कृतिक संबंधों और सभ्यतागत विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। खास बात यह है कि ये प्रदर्शनियां आम नागरिकों के लिए भी खुली रहेंगी।
मेहमानों को मिलेगा मध्य प्रदेश के पारंपरिक स्वाद का अनुभव
विदेशी प्रतिनिधियों के स्वागत में मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजनों की विशेष श्रृंखला तैयार की गई है। दाल-बाफले, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा, चंदिया, बड़ा और मिलेट्स आधारित कोदो-कुटकी जैसे स्थानीय व्यंजन परोसे जाएंगे। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की पसंद को ध्यान में रखते हुए वेस्टर्न और ओरिएंटल भोजन की भी विशेष व्यवस्था की गई है।

मानव संग्रहालय में होगा जनजातीय संस्कृति का परिचय
सम्मेलन के पहले दिन प्रतिनिधि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का भ्रमण करेंगे, जहां पारंपरिक मृदा शिल्प, स्वदेशी हस्तशिल्प और भारतीय जनजातीय संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा ‘नागा हाउस’ और ‘हिमालयी गांव’ का भ्रमण कर विदेशी मेहमान भारत की विविध जीवनशैली और स्थापत्य कला से परिचित होंगे। शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में कथक, पारंपरिक लोकनृत्य और भारत की विविध जनजातीय व पारंपरिक वेशभूषा पर आधारित फैशन शो मुख्य आकर्षण रहेगा।
6 अगस्त: सांस्कृतिक सहयोग पर होगी अहम चर्चा
सम्मेलन के दूसरे दिन ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों के घोषणापत्र के मसौदे, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण, संग्रहालयों, रचनात्मक उद्योगों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। शाम को रवींद्र भवन में BRICS सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित होगा, जहां विभिन्न देशों के कलाकार अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन करेंगे। यह कार्यक्रम आम जनता के लिए भी खुला रहेगा।

7 अगस्त: संगीत, संस्कृति और ‘पीस सॉन्ग’ बनेगा आकर्षण
तीसरे दिन ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्री भोपाल पहुंचेंगे। इस अवसर पर विशेष संगीत कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसकी शुरुआत ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ से होगी। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘BRICS Peace Song – Peace is the Language of the Land’ होगा, जिसमें भारत सहित ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, बेलारूस और संयुक्त अरब अमीरात की संगीत परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ से दिखेगी प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान
इसी दिन शाम को ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश – एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा’ का भव्य मंचन किया जाएगा। 125 से अधिक कलाकारों की प्रस्तुति में भीमबेटका, सांची, खजुराहो, उज्जैन, चित्रकूट, महेश्वर, ओरछा, मांडू और नर्मदा की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

8 अगस्त: संस्कृति मंत्रियों की बैठक और सांची भ्रमण
सम्मेलन के अंतिम दिन भारत की अध्यक्षता में तीसरी BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक होगी। इसमें सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए साझा घोषणा पत्र (BRICS Culture Ministers Declaration) को अपनाया जाएगा।बैठक के बाद विदेशी प्रतिनिधि यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची स्तूप का भ्रमण करेंगे। यहां योग, ध्यान, बौद्ध विरासत, 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो का आयोजन भी किया जाएगा।
9 अगस्त को होगा समापन
सम्मेलन के समापन के बाद इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों को विश्व प्रसिद्ध भीमबेटका शैलाश्रय के भ्रमण का अवसर मिलेगा, जहां वे भारत की प्रागैतिहासिक शैल कला और सांस्कृतिक धरोहर का अवलोकन करेंगे।
दुनिया के कई देशों के कलाकार देंगे प्रस्तुति
सम्मेलन में मिस्र, ब्राजील, रूस, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया सहित कई देशों के कलाकार लोकनृत्य, संगीत, मार्शल आर्ट, एक्रोबेटिक्स और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। इससे भोपाल चार दिनों तक वैश्विक सांस्कृतिक संगम का साक्षी बनेगा।