राजेश सोनी, डबरा: अब मेरे पास जीने की कोई वजह नहीं बची है, मैं इसी थाने की दहलीज पर अपनी जान दे दूंगा। यह रुंधे हुए गले और आंखों में आंसुओं का सैलाब लिए एक बेबस बुजुर्ग की वह चीख है, जो ग्वालियर जिले के डबरा पुलिस थाने में गूंजी है। 70 वर्षीय बुजुर्ग आराम सिंह गुर्जर पिछले 6 महीनों से न्याय की आस में थानों और बड़े अफसरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं।
लेकिन डबरा पुलिस का रवैया ऐसा है कि बुजुर्ग को हर बार सिर्फ तारीख पे तारीख थमा दी जाती है। व्यवस्था की इस बेरहमी से तंग आकर अब इस लाचार बुजुर्ग ने थाने परिसर में ही आत्मघाती कदम उठाने की चेतावनी दे डाली है।
टूट हाथ गया, भूख-प्यास से बेहाल
पीड़ित आराम सिंह गुर्जर की आपबीती क्षेत्र की लाचार कानून व्यवस्था की गवाही देती है। बुजुर्ग ने रोते हुए बताया कि डबरा थाना प्रभारी संजय शर्मा ने उन्हें मिलने का समय दिया था। वे सुबह से भूखे-प्यासे, सिर्फ एक कप चाय पीकर थाने के बाहर बैठे रहे। लेकिन हर बार की तरह थाना प्रभारी शाम को बिना मिले ही चले गए। कुछ दिन पहले थाने की सीढ़ियां उतरते समय बुजुर्ग अचानक लड़खड़ाकर गिर पड़े, जिससे उनका हाथ फ्रैक्चर हो गया। शारीरिक चोट के बाद भी डबरा पुलिस की संवेदना नहीं जागी।
46 लाख की महा-ठगी
बुजुर्ग आराम सिंह गुर्जर की दर्दनाक स्थिति के पीछे उनके अपने ही सगे खून का धोखा है। आराम सिंह की अपनी कोई संतान नहीं है, जिसके कारण वे अपने भाई के बेटे के परिवार के साथ डबरा में रहते हैं। बुढ़ापे की लाठी मजबूत रहे और किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े, इसके लिए उन्होंने बड़ोंनकला में अपनी पुश्तैनी जमीन बेची थी और पूरी रकम बैंक में सुरक्षित रख दी थी।
नाती ने खाली किया अकाउंट
बुजुर्ग के भाई के पोते जितेंद्र सिंह गुर्जर ने पहले धोखे से उधार के नाम पर 20 लाख रुपये ऐंठे। इसके बाद उसने आईसीआईसीआई बैंक जाकर बुजुर्ग के खाते का रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर ही बदलवा दिया और खाते में जमा शेष 26 लाख रुपये भी पार कर दिए। इस तरह बुजुर्ग से कुल 46 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई और अब पैसे वापस मांगने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
चौखट पर सिर पटक चुके हैं बुजुर्ग
हैरानी की बात यह है कि पीड़ित आराम सिंह ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह यादव सहित जिले के लगभग हर छोटे-बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की दहलीज पर गुहार लगा चुके हैं। लेकिन हर दफ्तर से उन्हें केवल आश्वासन की नई तारीखें मिलीं, लेकिन एक्शन नहीं। 6 महीने का लंबा वक्त बीत जाने के बावजूद ठग जितेंद्र सिंह गुर्जर के खिलाफ न तो कोई कानूनी कार्रवाई की गई और न ही उसे जेल भेजा गया। अब सवाल उठाता है कि क्या ग्वालियर पुलिस और डबरा पुलिस किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही नींद से जागेगी, या इस बुजुर्ग को जीते जी उसकी मेहनत की कमाई वापस दिला पाएगा? यह बड़ा सवाल है।