वॉशिंगटन: अमेरिका के मियामी में रहने वाली 50 वर्षीय डैडिस पेन्या गार्सेस की जिंदगी एक असफल कॉस्मेटिक सर्जरी के बाद पूरी तरह बदल गई है। खूबसूरत दिखने और आकर्षक शरीर पाने के लिए कराई गई ब्राज़ीलियन बट लिफ्ट सर्जरी ने उन्हें चलने, बोलने और यहां तक कि खुद से खाने-पीने लायक भी नहीं छोड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गार्सेस की यह सर्जरी एक ऐसे सर्जन ने की थी, जिसके पास सही ट्रेनिंग और बोर्ड सर्टिफिकेशन नहीं था। सर्जरी के कुछ हफ़्तों बाद ही गार्सेस को पल्मोनरी एंबोलिज्म (फेफड़ों में खून का थक्का जम जाना) हो गया। इसके कारण उनके दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंचा और वे स्थायी रूप से अपंग हो गईं। उनके पति जॉर्ज फर्नाडीज़ ने बताया कि उनकी पत्नी न बोल सकती हैं, और नहीं खुद से चल सकती हैं, यहां तक न ही खाना खा पाती हैं। वे पूरी तरह से अपमे पति की देखभाल पर निर्भर हैं।
मेडिकल विशेषज्ञ ने दी थी चेतावनी:
जॉर्ज ने बताया कि है, 'वो मेरी पहली मोहब्बत थीं, जो कभी मुझसे बात नहीं करेगी, और नहीं सामान्य जीवन जी पाएंगी।' बीबीएल सर्जरी में शरीर के अन्य हिस्सों जैसे कमर, पेट और जांघों से फैट निकालकर उसे बटॉक्स और हिप्स में इंजेक्ट किया जाता है ताकि शरीर को मनचाहा शेप मिल सके। लेकिन, मेडिकल विशेषज्ञ बार-बार चेतावनी देते रहे हैं कि यह सर्जरी बेहद खतरनाक हो सकती है। कई बार यह जानलेवा भी साबित होती है। गार्सेस ने यह सर्जरी मई 2023 में कराई थी। इसके बाद उन्हें गंभीर हालत में कई महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
गार्सेस की हालत अब भी गंभीर:
डॉक्टरों का कहना है कि उनकी हालत अब भी गंभीर बनी हुई है, और बेहतर होने की संभावना बहुत कम है। गार्सेस के पति ने अब कानूनी लड़ाई शुरू की है। उनके वकील लावेना सैंटोस का कहना है कि अगर गार्सेस को यह पता होता कि जिस सर्जन से वे इलाज करा रही हैं, वह बोर्ड-सर्टिफाइड प्लास्टिक सर्जन नहीं है, तो शायद वे कभी इतनी खतरनाक सर्जरी के लिए तैयार नहीं होतीं। उन्होंने कहा, 'मरीज को यह बताना जरूरी है कि उसका इलाज कौन कर रहा है। अगर जनता को पता हो कि डॉक्टर प्रमाणित या प्रशिक्षित नहीं है, तो अपनी जान जोखिम में डालकर शायद कोई भी ऑपरेशन नहीं करवाए। पर फ्लोरिडा के कानून के मुताबिक, किसी डॉक्टर के लिए वहां ये जरूरी नहीं माना जाता है कि, प्लास्टिक सर्जरी में वह बोर्ड-सर्टिफाइड हो, तब ही वह बीबीएल जैसी सर्जरी कर पाएगा।
इलाज के लिए परिवार जुटा रहा पैसे:
गार्सेस अब पूरी तरह से अपने पति पर निर्भर हैं। उनकी देखभाल और इलाज में भारी खर्च आ रहा है। इसके लिए एक गो फन्ड मी अभियान शुरू किया गया है, ताकि उनकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी हो सकें और घर को उनकी सुविधा के अनुसार बदला जा सके। अभियान में बताया गया है कि गार्सेस को सात महीने तक अस्पताल में रहना पड़ा और अब भी वे किसी भी काम को खुद से नहीं कर पा रही हैं। इसके साथ ही लगातार उनका इलाज और मेडिकल बिल बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बहुत से लोग आज भी केवल आकर्षक शरीर पाने की चाहत में ऐसी सर्जरी करा रहे है, जबकि इसके खतरे बार-बार उजागर किए जा चुके हैं।