INH नॉलेज : देश के सात अजूबों में एक अजूबा भारत के उत्तरप्रदेश में स्थित है। जिसे प्यार की निशानी कहा जाता है। हम बात कर रहे है दुनिया की खुबसूरत इमारतों में शुमार ताजमहल की। प्रेम के प्रतीक ताजमहल को शाहजहां ने बनवाया था। शाहजहां ने इस खूबसूरत इमारत को अपनी बेगम मुमताज की याद में बनवाया था।
कहते है कि ताजमहल को बनाने वालों के हाथ शाहजहां ने कटवा दिए थे, लेकिन क्या आपको पता है कि ताजमहल को बनाने वाला मुख्य मिस्त्री कौन था? कौन से मिस्त्री ने इस इमारत को इतना खूवसूरत बनाया था की आज भी विदेशी पर्यटक आगर में ताजमहल को निहारने आते है। आइए आपको बताते है।
पाकिस्तान से आया मिस्त्री!
ताजमहज दुनिया में एक मात्र ऐसी इमारत है जिसे कोई भी देखता है तो देखता ही रह जाता है। ताजमहल को बनाने में कई दिनों का समय लगा था। शाहजहां ने ताजमहल को बनाने के लिए पाकिस्तान के रहने वाले उस्ताद अहमद लाहौरी को जिम्मेदारी सौंपी थी। लाहौरी पाकिस्तान के लाहौरी में जन्मे थे। अहमद लाहौरी शाहजहां के दरबार का हिस्सा बनने के लिए लाहौर से दिल्ली आए थे।
लाहौरी को दी थी उपाधि
उस्ताद अहमद लाहौरी ने जब ताजमहल बना तो उसकी खूबसूरती देखकर शाहजहां काफी खुश हुए थे। उन्होंने अहमद लाहौरी को ‘नादिर-उल-असर’ की उपाधि से नवाजा था। हालांकि इतिहास के पन्नों में अहमद लाहौरी का जिक्र नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि उनके तीन बेटे थे। और वे शाहजहां के दरबार का हिस्सा हुआ करते थे।
20 हजार कारीगरों ने बनाया ताज
आपको बता दें कि ताजमहल को बनाने में कई महीनों का समय लगा था। इसके लिए करीब 20 हजार से अधिक कारीगिरों ने दिन रात एक करके ताजमहल को खड़ा किया था। ताजमहल बनाने वाली टीम में करीगिरों के अलावा राजमिस्त्री और सुलेखक भी शामिल थे।