नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी वायुसेना ने लगातार पांचवीं रात ईरान के कई रणनीतिक और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इस अभियान के दौरान दक्षिणी ईरान के महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर बंदर अब्बास और उसके आसपास मौजूद सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटनाक्रम को लेकर चिंता बढ़ गई है और पश्चिम एशिया में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
बंदर अब्बास क्यों बना अमेरिकी हमले का प्रमुख निशाना?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था। बयान में कहा गया कि मिसाइल लॉन्चिंग सिस्टम, तटीय रक्षा प्रतिष्ठान और अन्य रणनीतिक सैन्य ढांचे को निशाना बनाया गया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि लगातार हो रही बमबारी से ईरानी सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि ईरान की ओर से इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
व्हाइट हाउस का दावा- बातचीत के लिए इच्छुक है ईरान
हवाई हमलों के बीच व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में दावा किया कि सैन्य दबाव बढ़ने के बाद ईरान अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत के संकेत दे रहा है। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच बैक-चैनल संपर्क जारी हैं और राजनयिक समाधान की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है।
जंग के साथ कूटनीति भी जारी
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक प्रयास समानांतर रूप से जारी रहेंगे। उसका मानना है कि इस रणनीति से ईरान पर अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने का दबाव बढ़ेगा। दूसरी ओर, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य कार्रवाई और तेज हुई तो इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है।
क्षेत्र में बढ़ी चिंता
लगातार हो रहे हवाई हमलों और बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पश्चिम एशिया के कई देशों ने सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी है। वैश्विक समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीतिक प्रयास संघर्ष को रोक पाएंगे या हालात और गंभीर होंगे।