UP Bihar MLC Election 2026: उत्तर प्रदेश और बिहार में विधान परिषद की 19 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की इन सीटों पर होने वाला चुनाव राजनीतिक दलों के लिए अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबले पर नजर रहेगी, जबकि बिहार में एनडीए, महागठबंधन और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की भूमिका चर्चा में है। दोनों राज्यों में मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।
UP-Bihar MLC Election 2026: चुनाव की तारीख और सीटों का पूरा गणित
विधान परिषद चुनाव के तहत उत्तर प्रदेश की 11 और बिहार की 8 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इन चुनावों में केवल संबंधित स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में पंजीकृत मतदाता ही मतदान कर सकेंगे। आम विधानसभा चुनावों के विपरीत, यहां सभी सामान्य मतदाता वोट नहीं डालते हैं।
निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार, 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। इसके बाद 27 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी होनी है।
उत्तर प्रदेश में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला
उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों पर होने वाला चुनाव सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी समाजवादी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। राज्य में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव हो रहा है। इन सीटों के नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की संगठनात्मक सक्रियता और स्थानीय समर्थन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
भाजपा ने अपने उम्मीदवारों के समर्थन में संगठनात्मक नेटवर्क और स्थानीय स्तर पर संपर्क अभियान पर जोर दिया है। पार्टी की कोशिश अपने मौजूदा राजनीतिक आधार को बनाए रखने की है।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने पुरानी पेंशन योजना (OPS), शिक्षकों के मानदेय, बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी है। पार्टी इन विषयों के जरिए शिक्षक और स्नातक मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।
कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवारों और बागियों की मौजूदगी से मुकाबले के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। गोरखपुर-फैजाबाद और आगरा जैसे क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों तथा उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ पर भी नजर रहेगी।
बिहार में 8 सीटों पर NDA और महागठबंधन की परीक्षा
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इनमें पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र तथा पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
इन चुनावों में भाजपा, जनता दल यूनाइटेड (JDU) और एनडीए के अन्य सहयोगियों के सामने आपसी तालमेल बनाए रखने की चुनौती है। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और वाम दलों के महागठबंधन की रणनीति भी महत्वपूर्ण होगी।
बिहार में इन सीटों पर मुकाबला केवल पारंपरिक राजनीतिक गठबंधनों तक सीमित नहीं है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इससे कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबले का स्वरूप बदल सकता है।
शिक्षकों की समस्याएं, रोजगार, शिक्षा व्यवस्था और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे प्रचार के केंद्र में हैं। हालांकि, इन मुद्दों का चुनावी परिणाम पर कितना प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन मतगणना के बाद ही किया जा सकेगा।
पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार और अनुज कुमार सिंह की चर्चा
बिहार की पटना स्नातक निर्वाचन सीट पर मुकाबले को लेकर विशेष चर्चा है। जनता दल यूनाइटेड ने अपने वरिष्ठ नेता नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर, मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह द्वारा जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह को समर्थन दिए जाने की खबरों ने राजनीतिक हलकों में ध्यान खींचा है।
इस घटनाक्रम को जदयू के भीतर राजनीतिक मतभेदों के संदर्भ में देखा जा रहा है। चुनाव के दौरान किसी नेता का दूसरे उम्मीदवार का समर्थन करना स्थानीय समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका वास्तविक असर परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
इसी बीच, नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ने और अस्पताल में भर्ती होने की खबर भी सामने आई। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनसे मुलाकात की थी। इस घटनाक्रम के बीच पटना स्नातक सीट पर राजनीतिक गतिविधियां चर्चा में बनी हुई हैं।
सारण शिक्षक सीट पर बागी उम्मीदवार से मुकाबला दिलचस्प
बिहार की सारण शिक्षक निर्वाचन सीट पर भी उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक हलचल रही है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) से जुड़े रामपुकार सिन्हा की उम्मीदवारी और पार्टी की कार्रवाई को लेकर चर्चा हुई है। उनके नाम का मतपत्र पर बने रहना भी चुनावी परिदृश्य का एक अहम पहलू बताया जा रहा है।
ऐसी स्थिति में मतदाताओं के सामने उम्मीदवारों की पहचान, पार्टी से जुड़ाव और स्थानीय समर्थन जैसे पहलू महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, किसी उम्मीदवार की मौजूदगी से दूसरे प्रत्याशियों को कितना फायदा या नुकसान होगा, इसका अनुमान बिना ठोस आंकड़ों के लगाना उचित नहीं होगा।
जन सुराज की एंट्री से बिहार में बढ़े विकल्प
प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी बिहार के विधान परिषद चुनाव में अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारकर शिक्षा, रोजगार और व्यवस्था में बदलाव जैसे मुद्दों को उठाया है।
जन सुराज की भागीदारी से मतदाताओं के सामने एक अतिरिक्त राजनीतिक विकल्प मौजूद है। दूसरी ओर, महागठबंधन के घटक दलों के बीच उम्मीदवारों और स्थानीय चुनावी रणनीतियों को लेकर तालमेल भी अहम रहेगा।
इन चुनावों में जन सुराज का प्रदर्शन पार्टी के संगठनात्मक विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, उसके प्रभाव का वास्तविक आकलन मतगणना के बाद ही किया जा सकेगा।
23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को आएंगे नतीजे
उत्तर प्रदेश और बिहार में विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। प्रशासन की ओर से मतदान केंद्रों पर आवश्यक सुरक्षा और चुनाव प्रबंधन के इंतजाम किए जा रहे हैं। मतदाताओं को मतदान के दौरान निर्वाचन अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना होगा।
इन चुनावों में बैलेट पेपर के जरिए मतदान होगा और मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के क्रम में वरीयता देंगे। मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।
दोनों राज्यों की 19 सीटों के नतीजों से विधान परिषद में दलों की स्थिति पर असर पड़ेगा। साथ ही, शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के मुद्दों, उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़ तथा राजनीतिक दलों के संगठनात्मक प्रयासों को समझने का अवसर भी मिलेगा।