नई दिल्ली: मोबाइल रिचार्ज प्लान की वैलिडिटी को लेकर संसद में बड़ा मुद्दा उठाया गया है। आम आदमी पार्टी के सांसद Raghav Chadha ने राज्यसभा में टेलीकॉम कंपनियों के 28 दिन वाले प्रीपेड प्लान पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह व्यवस्था आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालती है। उन्होंने कहा कि जब एक कैलेंडर महीना 30 या 31 दिन का होता है, तो मोबाइल प्लान की वैधता केवल 28 दिन क्यों रखी जाती है। इससे यूजर्स को साल में 12 की जगह 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है।
28 दिन की वैलिडिटी से कैसे करना पड़ता है 13 बार रिचार्ज:
भारत में अधिकतर प्रीपेड मोबाइल प्लान 28 दिनों की वैधता के साथ आते हैं। यदि 28 दिन के हिसाब से गणना करें तो यानी पूरे साल की सेवा बनाए रखने के लिए यूजर्स को 12 की जगह 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है। सांसद राघव चड्ढा का कहना है कि इस मॉडल से टेलीकॉम कंपनियों को अतिरिक्त कमाई का फायदा मिलता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मोबाइल प्लान की वैधता कैलेंडर महीने यानी 30 या 31 दिनों के आधार पर तय की जानी चाहिए।
रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग कॉल क्यों बंद हो जाती है?
संसद में उठाए गए मुद्दे में एक और अहम सवाल यह था कि कई बार रिचार्ज खत्म होने के बाद केवल आउटगोइंग ही नहीं बल्कि इनकमिंग कॉल भी बंद हो जाती हैं। सांसद का कहना है कि यह स्थिति आम लोगों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है, क्योंकि आज मोबाइल नंबर कई जरूरी सेवाओं से जुड़ा हुआ है, जैसे बैंकिंग और OTP, सरकारी योजनाओं से जुड़े मैसेज, नौकरी और इंटरव्यू से संबंधित कॉल डिजिटल पेमेंट शामिल है। ऐसे में इनकमिंग कॉल बंद होने से लोगों को महत्वपूर्ण जानकारी या कॉल मिस हो सकती है। टेलीकॉम कंपनियां 28 दिन का प्लान क्यों देती हैं, टेलीकॉम कंपनियों के अनुसार 28 दिन की वैलिडिटी इसलिए रखी जाती है क्योंकि यह ठीक 4 सप्ताह के बराबर होती है। इससे बिलिंग और प्लान मैनेजमेंट सिस्टम को व्यवस्थित करना आसान होता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस मॉडल से कंपनियों को साल में एक अतिरिक्त रिचार्ज का फायदा भी मिलता है। भारत में टेलीकॉम सेक्टर को Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) रेगुलेट करता है। नियामक के नियमों के अनुसार कंपनियों को कम से कम एक ऐसा प्लान उपलब्ध कराना होता है जिसकी वैधता 30 दिन या उससे अधिक हो, लेकिन 28 दिन वाले प्लान पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है सीधा असर:
आज के समय में मोबाइल फोन केवल संचार का माध्यम नहीं बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। देश में करोड़ों लोग मोबाइल के जरिए बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान और सरकारी सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसे में रिचार्ज खत्म होते ही कॉल या मैसेज बंद होना खासकर सीमित आय वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
अब आगे क्या हो सकता है:
सांसद Raghav Chadha ने सरकार और टेलीकॉम कंपनियों से मांग की है कि मोबाइल रिचार्ज प्लान को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता-हितैषी बनाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि रिचार्ज प्लान की वैधता को कैलेंडर महीने के अनुसार तय किया जाए ताकि यूजर्स को हर साल अतिरिक्त रिचार्ज न करना पड़े। फिलहाल इस मुद्दे पर सोशल मीडिया और टेक सेक्टर में बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में इस पर सरकार या नियामक की प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है।