बैंकॉक/नोंथाबुरी। थाईलैंड के नोंथाबुरी जिले में शुक्रवार सुबह एक प्रतिष्ठित माध्यमिक विद्यालय में हुई गोलीबारी ने पूरे देश को झकझोर दिया। राजधानी बैंकॉक के बाहरी इलाके स्थित देबसिरिन स्कूल में एक छात्र द्वारा की गई अंधाधुंध फायरिंग में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद हमलावर छात्र ने कथित तौर पर खुद को भी गोली मार ली। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हैं।
सुबह स्कूल खुलने के दौरान हुई वारदात
जानकारी के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 10 बजे स्कूल परिसर में अचानक गोलियों की आवाज सुनाई दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक छात्र ने हथियार निकालकर स्कूल के भीतर फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस घटना से स्कूल में अफरा-तफरी मच गई और छात्र-छात्राएं अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। सूचना मिलते ही आपातकालीन सेवाओं, पुलिस और मेडिकल टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
शिक्षा मंत्री ने की मौतों की पुष्टि
थाईलैंड के शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस दर्दनाक घटना में शिक्षकों और छात्रों समेत कुल चार लोगों की मौत हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हमलावर छात्र ने घटना के बाद खुद को भी गोली मार ली। हालांकि जांच एजेंसियां यह स्पष्ट करने में जुटी हैं कि आधिकारिक मृतकों की संख्या में हमलावर शामिल है या नहीं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
घटना के तुरंत बाद स्कूल परिसर से कई वीडियो और लाइव स्ट्रीम सोशल मीडिया पर सामने आए। इनमें छात्र-छात्राओं को घबराहट में स्कूल से बाहर निकलते और एम्बुलेंस को लगातार पहुंचते देखा गया। इसके बाद प्रशासन ने लोगों से अपील की कि ऐसी संवेदनशील घटनाओं के वीडियो या लाइव स्ट्रीम साझा करने से बचें, ताकि जांच और राहत कार्य प्रभावित न हो।
फरवरी में भी हुई थी ऐसी घटना
यह पहली बार नहीं है जब थाईलैंड में किसी स्कूल को गोलीबारी का सामना करना पड़ा हो। इसी वर्ष फरवरी में सोंगख्ला प्रांत के एक स्कूल में हुई फायरिंग में एक शिक्षक की मौत और एक छात्र घायल हो गया था। उस घटना में हमलावर ने कुछ लोगों को बंधक भी बना लिया था, जिन्हें बाद में पुलिस ने सुरक्षित छुड़ा लिया था।
बंदूक संस्कृति पर फिर उठे सवाल
लगातार सामने आ रही गोलीबारी की घटनाओं के बाद थाईलैंड में हथियारों की उपलब्धता और बंदूक नियंत्रण कानूनों पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश में बड़ी संख्या में हथियार मौजूद होने के कारण इस तरह की घटनाओं को रोकना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। सरकार पहले भी हथियार कानूनों को सख्त करने की बात कह चुकी है, लेकिन अब तक अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए हैं।