भोपाल : देश में शिक्षा के स्तर को बेहतर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य कर दिया है। कोर्ट के फैसले को लेकर शिक्षकों में जहां नाराजगी है। तो वही नौकरी पर लटकती तलवार को देखते हुए मध्य प्रदेश सहित देशभर में शिक्षकों ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ हल्ला बोल शुरू कर दिया है। साथ ही पीएम मोदी के नाम ज्ञापन सौपने की भी तैयारी की जा रही है।
18 जून को PM मोदी के नाम ज्ञापन सौंपेंगे
शिक्षक संगठनों ने निर्णय लिया है कि 18 जून को प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टरों के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन में TET अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने और पुराने शिक्षकों को इससे छूट देने की मांग की जाएगी।
शिक्षकों ने फैसले को बताया अन्यायपूर्ण
शिक्षकों का तर्क है कि जिनकी नियुक्ति उस समय हुई थी, जब TET की व्यवस्था अस्तित्व में नहीं थी, उन पर बाद में बनाए गए नियम लागू करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की योग्यता और अनुभव को नजरअंदाज कर नए मानदंड थोपना अन्यायपूर्ण है। शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह फैसला न केवल शिक्षकों के हितों के खिलाफ है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।शिक्षक संगठनों को उम्मीद है कि सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए TET अनिवार्यता के संबंध में राहत देने वाला निर्णय लेगी।
जानें मामला
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 1 से VIII तक के शिक्षकों को टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना अनिवार्य किया है। इसके लिए शिक्षकों को कोर्ट ने 31 अगस्त, 2028 तक का समय दिया। अगर निर्धारित समय पर एग्जाम पास नहीं किया गया तो लाखों टीचर्स को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। ऐसे में नौकरी पर लटकती तलवार को देखते हुए मध्य प्रदेश सहित देशभर में शिक्षकों ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ हल्ला बोल शुरू कर दिया है।