भोपाल। हारमोनियम, सितार और सारंगी की धुन पर सजे लहरा और कायदा पर तबला वादन ने ग्वालियर किला को गुंजायमान कर दिया। यूनेस्को द्वारा चयनित संगीत नगरी में राष्ट्रीयता का उद्घोष करते हुए 1300 से अधिक संगीत साधकों ने प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और संगीत की त्रिवेणी को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करा दिया। ग्वालियर में तानसेन समारोह के अंतर्गत आयोजित ‘‘ताल दरबार’’ कार्यक्रम का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर उपस्थित रहे। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड संस्था का प्रमाण-पत्र ग्रहण किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस उपलब्धि को यादगार बनाने और सभी संगीत साधकों के सम्मान में 25 दिसंबर को पूरे प्रदेश में तबला दिवस मनाया जाएगा।
ताल दरबार के कला साधकों ने संगीत के कुंभ का नजारा दिखा दिया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलाकारों को संबोधित करते हुए कहा कि ताल दरबार के कला साधकों ने संगीत के कुंभ का नजारा दिखा दिया। आज स्वयं भगवान इंद्र की सभा का स्वरूप नजर आया। आप सभी की संगीत साधना को देखकर मैं धन्य हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तबलों की थाप से निकलता सुमधुर संगीत मातृभूमि को देश के हृदय स्थल से राष्ट्र को एक संगीतांजलि है। डॉ. यादव ने इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने पर सभी संगीत के गुरुओं और विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।
संगीत आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम है: ज्योतिरादित्य
कार्यक्रम में शामिल केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि संगीत अपनी आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक माध्यम है। आज ग्वालियर में तानसेन महोत्सव में ताल दरबार कार्यक्रम में 1500 वादकों का प्रदर्शन एक प्रत्यक्षदर्शी के रूप में सुनना आध्यात्मिक अनुभव रहा।
ग्वालियर वह धरती है जिस पर संगीत सांस लेता है: नरेंद्र सिंह तोमर
मप्र विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश की कला और संस्कृति का वैश्विक चित्र ‘‘ताल दरबार’’ तानसेन समारोह के शताब्दी वर्ष से पहले एक सांस्कृतिक प्रमाण है, जो इस बात की उद्घोषणा करता है कि प्रत्येक लय और प्रत्येक ताल जीवन का अनुशासन है और यह मावन जीवन की अनिवार्यता भी है। ग्वालियर वह धरती है जिस पर संगीत सांस लेता है। मैं संगीत की दुनिया के इन सभी कलाकारों को बधाई व शुभकामनाएं देता हूं, जिन्होंने भारतीय संगीत को इस आयाम तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास किया है।
पं. गणपति भट्ट हासणगि तानसेन सम्मान से अलंकृत
संगीतधानी ग्वालियर में आयोजित हुए भव्य समारोह में हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के मूर्धन्य गायक पं. गणपति भट्ट हासणगि धारवाड़ को वर्ष 2022 के ‘राष्ट्रीय तानसेन सम्मान’ से अलंकृत किया गया। साथ ही उज्जैन की संस्था मालव लोक कला केन्द्र को वर्ष 2022 का ‘राजा मानसिंह तोमर सम्मान’ प्रदान किया गया। प्रदेश सरकार के मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के मुख्य आतिथ्य में हजीरा स्थित सुर सम्राट तानसेन की समाधि के समीप ऐतिहासिक मानसिंह महल की थीम पर बने आकर्षक मंच पर सोमवार की सांध्यबेला में भव्य अलंकरण समारोह आयोजित हुआ।
राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की व्यस्तता और समय की कमी के चलते ग्वालियर में होते हुए भी मुख्यमंत्री तानसेन अलंकरण समारोह में शामिल नहीं हो सके। बाद में मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केन्द्रीय नागरिक उड्डयन व इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर का संदेश सुनाया।
उन्होंने कहा तीनों वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने अगले वर्ष आयोजित होने वाले 100वाँ तानसेन समारोह पूरी गरिमा एवं ऐतिहासिक भव्यता के साथ आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। समारोह में मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर व विधायक मोहन सिंह राठौर सहित अन्य अतिथियों ने पं. गणपति भट्ट को राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण के रूप में आयकर मुक्त पाँच लाख रूपए की सम्मान राशि, प्रशस्ति पट्टिका व शॉल-श्रीफल भेंट किए। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संगीत सम्राट तानसेन के नाम से स्थापित यह सम्मान भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में सर्वोच्च राष्ट्रीय संगीत सम्मान है। राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण से विभूषित पंडित गणपति भट्ट ने तानसेन सम्मान प्रदान करने के लिये राज्य सरकार के प्रति धन्यवाद व कृतज्ञता व्यक्त की।
उन्होंने कहा यह पुरस्कार हमारे लिए मेरी माताजी का प्रसाद है। उन्होंने इस अवसर पर अपने महान संगीतज्ञ गुरूओं स्व. बसवराज राजगुरू और पं. सी आर व्यास का स्मरण कर उन्हें नमन किया।
राष्ट्रीय राजा मानसिंह तोमर सम्मान के रूप में मालव लोक कला केन्द्र उज्जैन को पाँच लाख रूपए की आयकर मुक्त राशि और प्रशस्ति पट्टिका भेंट कर सम्मानित किया गया। संस्था की निदेशक कृष्णा वर्मा ने यह सम्मान ग्रहण किया। यह संस्था मालवा की लोक संस्कृति के विकास के लिये समर्पित है।
राजा मानसिंह तोमर सम्मान कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही संस्था को राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है। अलंकरण समारोह में नगर निगम के सभापति मनोज तोमर, संभाग आयुक्त दीपक सिंह, कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश चंदेल, संस्कृति विभाग के संचालक अदिति कुमार त्रिपाठी, उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक जयंत माधव भिसे तथा सर्वश्री अशोक शर्मा व बालखाण्डे सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण मंचासीन थे।
राजधानी में मंत्री पद की शपथ लेने के बाद पहली बार ग्वालियर पधारे मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने तानसेन की समाधि पर पहुँचकर चादर चढ़ाई। आरंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अंत में कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। स्वागत उदबोधन अलाउद्दीन खाँ कला अकादमी के निदेशक जयंत माधव भिसे ने दिया। संस्कृति विभाग के संचालक अदिति कुमार त्रिपाठी ने सम्मानित विभूतियों के सम्मान में प्रशस्ति वाचन किया।
तानसेन समारोह को और गौरवशाली बनाने के लिये सरकार कृत संकल्पित – मंत्री तोमर
अलंकरण समारोह को संबोधिहुए मंत्री श्री तोमर ने कहा कि तानसेन समारोह को और गौरवशाली बनाने के लिये प्रदेश सरकार कृत संकल्पित है। अगले साल आयोजित होने वाले 100वें तानसेन समारोह को ऐतिहासिक रूप देने के लिये अभी से तैयारियाँ की जायेंगीं। उन्होंने कहा खुशी की बात है कि ग्वालियर शहर को यूनेस्को द्वारा म्यूजिक सिटी घोषित किया गया है। म्यूजिक सिटी की गरिमा के अनुरूप शहर में और भी कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे।
27 दिसम्बर को स्थानीय अवकाश ..
अधिकाधिक रसिक तानसेन समारोह की सभाओं का आनंद ले सकें, इस उद्देश्य से संभाग आयुक्त दीपक सिंह ने 27 दिसम्बर को स्थानीय अवकाश घोषित किया है।
26 दिसम्बर को इनकी होगी प्रस्तुति ..
प्रात:कालीन सभा – आरंभ में भारतीय संगीत महाविद्यालय ग्वालियर की ध्रुपद प्रस्तुति होगी। इसके बाद विश्व संगीत के तहत नथाली रामिरेज मैक्सिको का बाँसुरी वादन, पारूल दीक्षित उपाध्याय ग्वालियर का गायन, पं. चिंतन उपाध्याय पुणे का ध्रुपद गायन, सुश्री अनुपमा भागवत बैंगलोर का सितार वादन और सुश्री पद्मिनी राव बैंगलोर का गायन होगा।
सायंकालीन सभा – सभा की शुरूआत शंकर गांधर्व संगीत महाविद्यालय ग्वालियर के ध्रुपद गायन से होगी।
इसके बाद विश्व संगीत के तहत अफगानिस्तान के जनाब सुल्तान मसूद का वायोलिन वादन, सुश्री हेमांगी नेने हैदराबाद का गायन, जनाब अमान – अयान अली बंगश दिल्ली की सरोद जुगलबंदी, पं. रघुनंदन पणशीकर पुणे का गायन एवं पद्मश्री पं. विजय घाटे पुणे के तबला वादन की प्रस्तुति होगी।