T20 World Cup 2026 के ग्रुप चरण में बड़ा नाटकीय मोड़ तब आया जब जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम और आयरलैंड क्रिकेट टीम के बीच मुकाबला बारिश की वजह से बिना नतीजे के समाप्त हो गया। यह मैच पल्लेकेले इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाना था, लेकिन मौसम ने खेल बिगाड़ दिया। दोनों टीमों को एक-एक अंक मिलने से जिम्बाब्वे के कुल 5 अंक हो गए और उसने सुपर-8 में जगह पक्की कर ली। इस परिणाम के साथ ही ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम और आयरलैंड दोनों टूर्नामेंट से बाहर हो गए।
जिम्बाब्वे का ऐतिहासिक प्रदर्शन:
इस टूर्नामेंट में जिम्बाब्वे का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। टीम ने पहले मुकाबले में ओमान को हराया और फिर कोलंबो में खेले गए मैच में ऑस्ट्रेलिया को 23 रन से मात देकर बड़ा उलटफेर किया। लगातार अच्छे खेल के दम पर टीम सुपर-8 के ग्रुप-1 में पहुंच गई है, जहां उसे भारत क्रिकेट टीम, दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट टीम और वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम जैसी मजबूत टीमों का सामना करना होगा। ग्रुप-बी से जिम्बाब्वे के साथ श्रीलंका क्रिकेट टीम ने भी आगे का सफर तय किया है।
ऑस्ट्रेलिया के लिए निराशाजनक अभियान:
ऑस्ट्रेलियाई टीम का यह प्रदर्शन पिछले कई वर्षों में सबसे खराब माना जा रहा है। 2009 के बाद पहली बार टीम टी20 वर्ल्ड कप के ग्रुप चरण से बाहर हुई है। इस बार टीम को श्रीलंका और जिम्बाब्वे से हार झेलनी पड़ी, जिससे सेमीफाइनल की उम्मीदें पूरी तरह खत्म हो गईं। तीन मैचों में दो हार ने कंगारू टीम का सफर जल्दी समाप्त कर दिया।
सुपर-8 की जंग हुई दिलचस्प:
जिम्बाब्वे के क्वालीफाई करते ही सुपर-8 के ग्रुप-1 की तस्वीर साफ हो गई है। अब इस ग्रुप से सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए भारत, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। जिम्बाब्वे की मौजूदा फॉर्म को देखते हुए बड़ी टीमों को सतर्क रहने की जरूरत होगी। वहीं ऑस्ट्रेलिया का शुरुआती चरण में बाहर होना टूर्नामेंट का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।भारत और फ्रांस ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का ऐलान किया है। यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुंबई में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद की गई। इस समझौते का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में सह-डिजाइन, सह-उत्पादन और उन्नत सैन्य तकनीकों का संयुक्त विकास है, जिससे भारत की सामरिक क्षमता और आत्मनिर्भरता दोनों मजबूत होंगी।
राफेल-मरीन और नए लड़ाकू विमानों पर बड़ा फैसला:
समझौते के तहत भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-मरीन फाइटर जेट और वायुसेना के लिए 114 मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई है। फ्रांस की रक्षा इंजन निर्माता कंपनी सफरान भारतीय साझेदारों के साथ मिलकर लड़ाकू विमान इंजन का निर्माण भारत में करेगी। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ को रक्षा क्षेत्र में नई गति देने वाली मानी जा रही है।
मिसाइल और हेलीकॉप्टर निर्माण में स्वदेशीकरण:
भारत में गाइडेड मिसाइल निर्माण को बढ़ावा देने के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और सफरान मिलकर HAMMER मिसाइलों का उत्पादन करेंगे। साथ ही टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस के सहयोग से देश की पहली निजी हेलीकॉप्टर निर्माण सुविधा स्थापित की गई है, जहां H125 हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली होगी और निर्यात की संभावनाएं भी खुलेंगी।
समुद्री सुरक्षा और पनडुब्बी कार्यक्रम में सहयोग:
स्कॉर्पीन पनडुब्बी कार्यक्रम (प्रोजेक्ट-75) के तहत सभी छह पनडुब्बियां भारतीय नौसेना को सौंपी जा चुकी हैं। दोनों देशों ने भविष्य की पनडुब्बी तकनीकों पर सहयोग जारी रखने का संकल्प दोहराया है। इसके अलावा ‘वरुण’, ‘शक्ति’ और ‘गरुड़’ जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यासों के माध्यम से सामरिक तालमेल को और मजबूत किया जाएगा।
अंतरिक्ष, साइबर और उभरती तकनीकों पर संयुक्त पहल:
रक्षा सहयोग को भविष्य-उन्मुख बनाने के लिए एक जॉइंट एडवांस्ड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट ग्रुप बनाया जाएगा। भारत का डीआरडीओ और फ्रांस का डीजीए स्पेस सिचुएशन अवेयरनेस समेत अंतरिक्ष रक्षा क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त, सुरक्षित और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।भारत-फ्रांस ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ केवल रक्षा खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी साझेदारी, स्वदेशी उत्पादन और भविष्य की युद्धक क्षमताओं के संयुक्त विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह समझौता भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और वैश्विक सामरिक भूमिका को नई मजबूती देता है।