नई दिल्ली। Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को कारोबार की शुरुआत से ही भारी बिकवाली देखने को मिली। BSE Sensex और NSE Nifty दोनों प्रमुख सूचकांक दबाव में नजर आए। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 600 अंकों की गिरावट के साथ खुला, जबकि निफ्टी भी 200 अंकों से ज्यादा नीचे फिसल गया। इसके बाद बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ा और दोपहर के कारोबार में सेंसेक्स की गिरावट 1,150 अंकों से अधिक तक पहुंच गई।
खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट
गुरुवार को सेंसेक्स पिछले बंद स्तर 74,828 के मुकाबले करीब 74,272 के स्तर पर खुला। शुरुआती मिनटों में ही इंडेक्स 74,200 के नीचे चला गया। वहीं Nifty 50 भी पिछले बंद 23,446 के मुकाबले लगभग 23,222 के आसपास खुला और शुरुआती कारोबार में 23,200 के नीचे फिसल गया। बाजार में बिकवाली का असर सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला और अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
दोपहर तक 1200 अंक से ज्यादा टूटा सेंसेक्स
कारोबार आगे बढ़ने के साथ बाजार में गिरावट गहरी होती गई। दोपहर के आसपास सेंसेक्स की गिरावट 1,100 अंकों से ऊपर पहुंच गई और बाद के कारोबार में यह 1,150 अंक से ज्यादा तक टूट गया। निफ्टी भी 23,100 के नीचे फिसल गया। एनडीटीवी प्रॉफिट के मुताबिक दोपहर 2:03 बजे तक NSE पर 2,601 शेयर गिरावट में थे, जबकि 830 शेयर बढ़त में कारोबार कर रहे थे।
इन बड़े शेयरों में भी भारी बिकवाली
बाजार में गिरावट के दौरान बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के कई प्रमुख शेयरों पर दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Bajaj Finance करीब 4.75 फीसदी नीचे था, जबकि Bajaj Finserv में करीब 3.49 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Axis Bank, Kotak Mahindra Bank और HDFC Bank भी दबाव में रहे। ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 दोनों में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
शेयर बाजार में गिरावट के पीछे क्या वजह?
1. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल
बाजार में दबाव बढ़ने की प्रमुख वजहों में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज बढ़ोतरी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद के उच्च स्तर पर पहुंच गई। बढ़ती बॉन्ड यील्ड से इक्विटी जैसे जोखिम वाले एसेट्स पर दबाव बढ़ सकता है।
2. अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर चिंता
अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के मजबूत रहने के बाद फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में भी बदलाव आया है। इससे वैश्विक निवेशकों के बीच जोखिम को लेकर सतर्कता बढ़ी और इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।
3. कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आई। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने के बाद बाद के कारोबार में 106 डॉलर के आसपास भी पहुंचा। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए लंबे समय तक महंगा कच्चा तेल महंगाई और चालू खाते से जुड़े दबाव बढ़ा सकता है।
4. वैश्विक बाजारों का कमजोर संकेत
अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाला। ऐसे वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय बाजार में शुरुआती बिकवाली तेज होती गई।
NSE IPO की लिस्टिंग के बीच बाजार में हलचल
गुरुवार को NSE IPO की बहुप्रतीक्षित लिस्टिंग भी हुई। ₹22,561.57 करोड़ के इस इश्यू के लिए प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर था और IPO को कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। NSE IPO की लिस्टिंग 24 सितंबर को BSE पर निर्धारित थी। लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट प्रीमियम में भी काफी बदलाव देखने को मिला। 24 सितंबर की सुबह उपलब्ध आंकड़ों में GMP करीब ₹38 बताया गया था, हालांकि GMP केवल अनौपचारिक बाजार संकेतक है और वास्तविक लिस्टिंग कीमत इससे अलग हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है आज का बाजार?
शेयर बाजार में एक ही दिन में इतनी बड़ी गिरावट से निवेशकों के पोर्टफोलियो पर सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि, किसी शेयर या इंडेक्स की आगे की दिशा केवल एक कारोबारी दिन की चाल से तय नहीं होती। वैश्विक बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी मौद्रिक नीति, विदेशी निवेश और घरेलू आर्थिक आंकड़े आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रह सकते हैं।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिम के अधीन है। यह खबर केवल बाजार की गतिविधियों की जानकारी देने के उद्देश्य से है, इसे निवेश सलाह न माना जाए।