Nag Panchami 2026: सावन मास की नाग पंचमी इस बार बेहद खास संयोग लेकर आई है। वर्ष 2026 में नाग पंचमी सोमवार के दिन पड़ रही है। सोमवार और नाग पंचमी के इस संयोग को सोमवती नाग पंचमी कहा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, जबकि नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा की जाती है। ऐसे में दोनों पर्व एक ही दिन पड़ने से इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि इससे पहले ऐसा संयोग वर्ष 2003 में बना था। इस तरह के संयोग के लिए अब करीब 14 वर्ष का इंतजार करना होगा। नाग पंचमी के दिन सावन के तीसरे सोमवार का व्रत भी रखा जाएगा।
कब से कब तक रहेगी पंचमी तिथि?
पंचमी तिथि की शुरुआत 16 अगस्त को दोपहर 4:52 बजे से हो चुकी है, जबकि इसका समापन 17 अगस्त की शाम करीब 5 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर नाग पंचमी का पर्व आज मनाया जा रहा है। इस दिन शुभ योग, शुक्ल योग और रवि योग बनने की बात कही गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ संयोगों में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करने से सुख-शांति की प्राप्ति होती है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस दिन कालसर्प दोष और पितृ दोष से जुड़े उपाय करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
नाग पंचमी पर शिव-नाग पूजा का महत्व
हिंदू धर्म में पंचमी तिथि का संबंध नाग देवता से माना जाता है। यही वजह है कि सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। सावन भगवान शिव को समर्पित महीना माना जाता है। भगवान शिव के गले में नागराज वासुकी विराजमान हैं। वहीं भगवान विष्णु का संबंध शेषनाग से माना जाता है। इसी कारण सावन की पंचमी को भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
नाग पंचमी पूजा का सबसे शुभ समय
नाग पंचमी पर पूजा के लिए सुबह 5:50 बजे से 8:28 बजे तक का समय सबसे उत्तम बताया गया है। इस दौरान करीब 2 घंटे 37 मिनट तक पूजा का शुभ समय रहेगा। भक्त इस अवधि में नाग देवता के साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कालसर्प दोष, पितृ दोष और नाग संबंधी दोषों के निवारण के लिए पूजा-पाठ और उपाय किए जाते हैं।
आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:25 बजे से 5:09 बजे तक
नाग पंचमी पूजा का शुभ समय: सुबह 5:50 बजे से 8:28 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:52 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:37 बजे से 3:29 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:59 बजे से 7:21 बजे तक
नाग पंचमी पर क्या करें?
नाग पंचमी के दिन श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं और नाग देवता की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं। शिवलिंग पर जल अर्पित करने के साथ शिव मंत्रों का जाप और पूजा-पाठ करना शुभ माना जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग देवता प्रकृति और जीव-जगत के संरक्षण के प्रतीक भी माने जाते हैं। इसलिए इस पर्व का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवों के प्रति सम्मान का संदेश देना भी है।
धार्मिक सूचना: पूजा के मुहूर्त और ज्योतिषीय उपाय स्थानीय पंचांग, स्थान और परंपरा के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकते हैं। किसी विशेष दोष के निवारण के लिए योग्य ज्योतिषाचार्य या धर्माचार्य की सलाह लेना उचित है।