नई दिल्ली। बांग्लादेश से निर्वासन की दूसरी बरसी पर पूर्व प्रधानमंत्री और आवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना ने वर्चुअल संबोधन के जरिए देश की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। अपने भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि आज का बांग्लादेश उस सपने से बिल्कुल अलग है, जिसके लिए 1971 के मुक्ति संग्राम में लाखों लोगों ने बलिदान दिया था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि भले ही उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा हो, लेकिन उनका मन आज भी बांग्लादेश की जनता के साथ है।
'यह छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था'
शेख हसीना ने वर्ष 2024 में हुए आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने शुरू से ही संवाद, संवैधानिक प्रक्रिया और धैर्य के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश की थी। उनके अनुसार, छात्र आंदोलन की आड़ में कुछ संगठित समूहों ने हालात को राजनीतिक हिंसा की ओर मोड़ दिया। उन्होंने दावा किया कि सुधार की मांगों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्य साधने के लिए किया गया, जिससे देश में अस्थिरता बढ़ी।
बांग्लादेश के भविष्य को लेकर जताई चिंता
अपने संबोधन में शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अपने व्यक्तिगत भविष्य से ज्यादा बांग्लादेश के भविष्य की चिंता है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक सुरक्षा, विकास, आर्थिक समृद्धि और स्थायी शांति चाहते हैं तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
लोकतांत्रिक अधिकार बहाल करने की उठाई मांग
शेख हसीना ने अपने संबोधन के दौरान कई मांगें भी सामने रखीं। इनमें प्रमुख रूप से:
आवामी लीग पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं।
राजनीतिक बंदियों को रिहा किया जाए।
राजनीतिक मामलों में दर्ज कथित झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहाल की जाए।
प्रेस की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाए।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता की गारंटी दी जाए।
कानून लागू करने वाली एजेंसियां निष्पक्ष रूप से जनता की सेवा करें।
आवामी लीग नेताओं ने भी सरकार पर साधा निशाना
कार्यक्रम में शेख हसीना के संबोधन से पहले निर्वासन में रह रहे आवामी लीग के वरिष्ठ नेताओं ने भी अपनी बात रखी। पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल ने कहा कि उनकी पार्टी बदले की राजनीति नहीं बल्कि न्याय चाहती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया जा रहा है और कहा कि देश को अस्थिर या विफल राष्ट्र बनने से बचाने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना जरूरी है।
बांग्लादेश की राजनीति में फिर बढ़ी हलचल
शेख हसीना के इस संबोधन के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। उनके बयान और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने की संभावना जताई जा रही है। वहीं आवामी लीग समर्थकों ने भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने की जरूरत पर जोर दिया।