Sourav Das Ashutosh Ranka Bail: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को आठ दिन बाद जमानत मिल गई है। दिल्ली की अदालत ने दोनों को निजी मुचलके और जमानत बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, जेल से बाहर आने के बाद भी दोनों की कानूनी मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। मिली जानकारी के मुताबिक, दोनों को राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में 22 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे पेश होकर अपना बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया है। यह कार्रवाई जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और कथित तौर पर शांति बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन से जुड़े मामले में की जा रही है।
अदालत ने खारिज की पुलिस की हिरासत बढ़ाने की मांग
सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद उन्हें विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में पेश किया गया। दिल्ली पुलिस ने जांच के लिए दोनों की हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी। पुलिस की दलील थी कि दोनों के बयानों में विरोधाभास है और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। हालांकि, अदालत ने पुलिस की मांग स्वीकार नहीं की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने निजी मुचलके और जमानत बॉन्ड पर रिहाई का आदेश दिया। आदेश के अनुसार, यदि किसी अन्य मामले में हिरासत की आवश्यकता नहीं है, तो दोनों को तिहाड़ जेल से रिहा किया जा सकता है।
50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर मिली जमानत
अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानत बॉन्ड पर रिहा करने का निर्देश दिया। दोनों नेताओं ने लिखित हलफनामा देकर आश्वासन दिया कि जब तक जंतर-मंतर का संबंधित क्षेत्र डी-नोटिफाइड रहेगा, वे वहां शांति भंग नहीं करेंगे और न ही किसी प्रदर्शन का आह्वान करेंगे। वकील की ओर से माफी और अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासनों को भी सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण माना गया। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने न्यायिक हिरासत आगे बढ़ाने की आवश्यकता नहीं मानी।
दिल्ली हाईकोर्ट में भी हुई सुनवाई
इससे पहले दोनों नेताओं ने न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब मजिस्ट्रेट कोर्ट में मामला लंबित है और कानून में वैकल्पिक उपाय मौजूद हैं, तो सीधे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका क्यों दाखिल की गई। अदालत ने बॉन्ड की शर्तों, जमानतदारों और मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल किए। सुनवाई के दौरान सौरव दास की उम्र 27 वर्ष और आशुतोष रांका की उम्र 31 वर्ष बताई गई। कोर्ट ने उनकी उम्र और Gen Z होने के दावे के संदर्भ में भी टिप्पणी की। बाद में दोनों नेताओं ने अपनी याचिकाएं वापस ले लीं और मजिस्ट्रेट कोर्ट की प्रक्रिया के तहत राहत मिलने का इंतजार किया।
सौरव दास और आशुतोष रांका पर कौन-कौन सी धाराएं लगी हैं?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं के खिलाफ अलग-अलग थानों में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। कनॉट प्लेस थाने में दर्ज एफआईआर में धारा 223A, 332 और 61(2) का उल्लेख है। वहीं, संसद मार्ग थाने में दर्ज दूसरी एफआईआर में धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) का उल्लेख किया गया है। इन मामलों में सरकारी आदेश की अवहेलना, आपराधिक साजिश, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने और चोट पहुंचाने जैसे आरोपों से संबंधित प्रावधान शामिल बताए गए हैं। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही तय होगा।
14 अक्टूबर को हिरासत में लिए गए थे दोनों नेता
सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को संसद मार्ग थाना पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत निवारक कार्रवाई करते हुए हिरासत में लिया था। आरोप था कि दोनों ने जंतर-मंतर के प्रतिबंधित या डी-नोटिफाइड प्रदर्शन क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश किया और पहले से दिए गए शांति बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया। इसके बाद उनकी हिरासत बढ़ाई गई और मामले को लेकर कानूनी सुनवाई जारी रही।
क्राइम ब्रांच के समन के बाद आगे क्या होगा?
जमानत मिलने के बावजूद क्राइम ब्रांच की पूछताछ दोनों नेताओं के लिए अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। पुलिस ने उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए पेश होने को कहा है। पूछताछ में मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी ली जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे निर्धारित बताई गई है। ऐसे में अब सबकी नजर पुलिस की जांच और अदालत में होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी।