भोपाल। सफलता हासिल करने के लिए महंगे संसाधनों और सुविधाओं से ज्यादा जरूरी है मेहनत करने का जज्बा और अपने लक्ष्य के प्रति विश्वास। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की प्रीति प्रजापति इसी सोच की मिसाल बनकर सामने आई हैं। सीमित आर्थिक परिस्थितियों में पली-बढ़ीं प्रीति ने सोशल मीडिया को अपनी प्रतिभा दिखाने का माध्यम बनाया। आज वह अपनी रील्स के जरिए लोगों तक पहुंच रही हैं और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभिनेत्री बनने की ख्वाहिश रखती हैं। प्रीति की कहानी सिर्फ सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, पारिवारिक सहयोग और मुश्किल हालात में भी आगे बढ़ते रहने की है। कभी उन्हें अपने घर के माहौल को लेकर झिझक महसूस होती थी, तो कभी त्वचा के रंग को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ता था। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने दूसरों की सोच से ज्यादा अपनी प्रतिभा पर भरोसा करना सीखा।
भोपाल की बस्ती से शुरू हुआ प्रीति का सफर
प्रीति प्रजापति का जन्म भोपाल में हुआ। उनका परिवार मूल रूप से बिहार से आया था और बाद में भोपाल में ही बस गया। परिवार में पांच भाई-बहन हैं। उनके पिता मिस्त्री का काम करते हैं, जबकि उनकी मां घर की जिम्मेदारियां निभाने के साथ एक छोटी दुकान भी चलाती हैं। परिवार की सीमित आमदनी के कारण प्रीति ने बचपन से ही आर्थिक चुनौतियों को करीब से देखा। उन्होंने अपनी पढ़ाई भोपाल में पूरी की और एक समय उनका लक्ष्य सिविल सेवा में जाकर कलेक्टर बनना था। वह इस दिशा में तैयारी भी कर रही थीं। हालांकि, कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान उनकी पढ़ाई का सिलसिला प्रभावित हुआ। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाना शुरू किया। शुरुआत में यह उनके लिए एक नया प्रयोग था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता सामने लाने का जरिया बना लिया।
मां की पुरानी साड़ियों से तैयार किए नए कपड़े
सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो बनाने के लिए अलग-अलग कपड़ों और नए लुक की जरूरत पड़ती थी। लेकिन प्रीति के परिवार के लिए बार-बार नए कपड़े खरीदना आसान नहीं था। ऐसे में उनकी बहन रेखा ने उनका साथ दिया और मां की पुरानी साड़ियों से नए डिजाइन के कपड़े तैयार करने शुरू किए। इन्हीं कपड़ों को पहनकर प्रीति रील्स शूट करती थीं। उनके पास न तो महंगा स्टूडियो था और न ही वीडियो बनाने के लिए बड़े बजट की सुविधा। इसके बावजूद उन्होंने उपलब्ध संसाधनों से काम चलाया और नए-नए प्रयोग करती रहीं।यह सहयोग प्रीति के लिए काफी अहम साबित हुआ। उनकी बहन ने कपड़े तैयार करने में मदद करने के साथ उन्हें अपने काम को जारी रखने का हौसला भी दिया। प्रीति अपने सफर में बहन रेखा के योगदान को विशेष महत्व देती हैं।
जब अपने ही घर और बस्ती को दिखाने से लगता था डर
प्रीति के लिए सोशल मीडिया पर शुरुआत करना आसान नहीं था। उन्हें आशंका रहती थी कि अगर लोग उनके घर और आसपास के माहौल को देखेंगे, तो उनके बारे में क्या सोचेंगे। इसी वजह से शुरुआती दौर में वह पर्दा लगाकर वीडियो बनाती थीं, ताकि घर का वास्तविक परिवेश सामने न आए। लेकिन इस तरीके से उन्हें वह पहचान नहीं मिल पा रही थी, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। इसके बाद उन्होंने अपनी सोच बदलने का फैसला किया। उन्होंने महसूस किया कि दूसरों की राय के डर से अपनी वास्तविक जिंदगी छिपाना जरूरी नहीं है।इसी बदलाव के बाद प्रीति ने अपनी बस्ती में रैंप वॉक करते हुए एक वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। उनके मुताबिक, इस वीडियो को एक दिन में लाखों लोगों ने देखा और कई चर्चित हस्तियों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। इस वीडियो से उन्हें व्यापक पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने अपने आसपास के माहौल को छिपाने के बजाय उसे अपनी रचनात्मकता का हिस्सा बनाना शुरू किया। उनके लिए यह बदलाव सिर्फ कंटेंट बनाने के तरीके में परिवर्तन नहीं था, बल्कि अपने जीवन को स्वीकार करने और आत्मविश्वास के साथ सामने आने की दिशा में भी एक कदम था।
पिता चाहते थे पढ़ाई पर ध्यान दें
प्रीति जब वीडियो बनाने लगीं, तब उनके पिता को यह समझ नहीं आता था कि सोशल मीडिया पर रील्स बनाने से भविष्य कैसे बेहतर हो सकता है। वह चाहते थे कि बेटी पढ़ाई पर ध्यान दे और अपने करियर के लिए कोई स्थिर रास्ता चुने।समय के साथ प्रीति की मेहनत और सोशल मीडिया पर बढ़ती पहचान ने परिवार की सोच में बदलाव लाया। प्रीति के अनुसार, अब उनके पिता भी उनसे उम्मीद रखते हैं कि वह अपने काम से परिवार का नाम रोशन करेंगी। इस सफर में उनकी बहन रेखा का योगदान भी उल्लेखनीय रहा। आर्थिक सीमाओं के बीच नए कपड़ों की व्यवस्था करना हो या लगातार वीडियो बनाने के लिए प्रेरित करना, रेखा ने कई स्तरों पर उनका साथ दिया। प्रीति मानती हैं कि परिवार के इस सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
त्वचा के रंग को लेकर झेलनी पड़ीं अपमानजनक टिप्पणियां
सोशल मीडिया पर पहचान मिलने के साथ प्रीति को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। उनके रंग को लेकर कुछ लोगों ने आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां कीं। ऐसे कमेंट्स से उन्हें शुरुआत में दुख होता था और उनका आत्मविश्वास भी प्रभावित होता था। हालांकि, अब प्रीति ने ऐसी टिप्पणियों को अपनी राह में बाधा नहीं बनने देने का फैसला किया है। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की योग्यता, प्रतिभा और संभावनाओं का आकलन उसके त्वचा के रंग के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।प्रीति का संदेश स्पष्ट है कि किसी को किसी का वीडियो पसंद नहीं आता, तो वह उसे देखना छोड़ सकता है। लेकिन किसी के रंग या रूप को लेकर अपमानजनक बातें करना उचित नहीं है। उनका अनुभव इस बात की ओर भी ध्यान दिलाता है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता के साथ लोगों को अनावश्यक आलोचना और व्यक्तिगत टिप्पणियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे माहौल में आत्मविश्वास बनाए रखना किसी भी नए क्रिएटर के लिए महत्वपूर्ण है।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से ग्लोबल एक्ट्रेस बनने की तैयारी
प्रीति प्रजापति का लक्ष्य सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। वह भविष्य में अभिनेत्री बनना चाहती हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित करने का सपना देखती हैं।उनकी आकांक्षा है कि उनकी प्रतिभा को देश के साथ-साथ दुनिया के अन्य हिस्सों में भी पहचान मिले। सीमित संसाधनों से शुरुआत करने के बावजूद वह अपने लक्ष्य को लेकर आशावान हैं। प्रीति की कहानी यह बताती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म लोगों को अपनी प्रतिभा सामने लाने का अवसर दे सकते हैं। हालांकि, अभिनय की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए उन्हें अपने कौशल को विकसित करने, नए अवसर तलाशने और लगातार मेहनत करने की जरूरत होगी। उनका सफर अभी जारी है और ग्लोबल एक्ट्रेस बनने का सपना उनके सामने अगला बड़ा लक्ष्य है।
लड़कियों के लिए प्रीति का संदेश: दूसरों की बातों से अपने सपने न छोड़ें
प्रीति उन लड़कियों को प्रेरित करना चाहती हैं, जो अपने रंग, कद, आर्थिक स्थिति या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण खुद को दूसरों से कम समझती हैं। उनका कहना है कि लोगों की टिप्पणियों से निराश होकर अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी की काबिलियत उसके बाहरी रूप या आर्थिक स्थिति से तय नहीं होती। यदि किसी के पास बड़े सपने हैं, तो उसे अपनी परिस्थितियों के अनुसार रास्ते तलाशने चाहिए और उपलब्ध साधनों का बेहतर उपयोग करना चाहिए। प्रीति की अपनी यात्रा भी इसी विचार को सामने रखती है। मां की पुरानी साड़ियों से कपड़े तैयार करने से लेकर अपनी बस्ती में वीडियो शूट करने तक, उन्होंने सीमित साधनों को अपने काम की बाधा नहीं बनने दिया।
प्रीति प्रजापति की कहानी क्यों है खास?
प्रीति का सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने हुनर को सामने लाने से हिचकते हैं। उनकी कहानी में परिवार का सहयोग, सामाजिक पूर्वाग्रहों का सामना और अपनी पहचान स्वीकार करने जैसे कई पहलू शामिल हैं। उनकी सफलता की यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर मिली पहचान के बाद अब वह अभिनय की दुनिया में आगे बढ़ने की आकांक्षा रखती हैं। उनका सपना कितना बड़ा है, यह उनके लक्ष्य से स्पष्ट होता है; वहीं उनकी अब तक की यात्रा बताती है कि शुरुआत करने के लिए हमेशा बड़े साधनों की जरूरत नहीं होती। प्रीति प्रजापति की कहानी का संदेश यही है कि परिस्थितियां किसी की शुरुआत को सीमित कर सकती हैं, लेकिन सपने देखने और उन्हें पूरा करने की कोशिश करने का अधिकार हर व्यक्ति के पास है।