नई दिल्ली। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने अपनी अगली रणनीति पर चर्चा की तैयारी की है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को दिल्ली स्थित अपने आवास पर गठबंधन के सांसदों को हाई-टी के लिए आमंत्रित किया है। बैठक में आगे के विरोध प्रदर्शनों, साझा राजनीतिक कार्यक्रम और संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर चर्चा होने की संभावना है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी के 5, सुनहरी बाग रोड स्थित आवास पर होने वाली इस बैठक का मुख्य मुद्दा कथित वोट चोरी के आरोप और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्षी मांग है। बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस या आगे के विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा भी सामने आ सकती है।
मार्च फॉर डेमोक्रेसी के बाद विपक्ष की अगली तैयारी
दिल्ली में 12 अक्टूबर को आयोजित ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ के बाद विपक्षी दलों की गतिविधियां तेज हुई हैं। इस प्रदर्शन में मतदाता सूची में बदलाव, SIR प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए गए। विपक्षी नेताओं ने इन मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है। विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के बीच चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची में हुए बदलाव राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे में राहुल गांधी के आवास पर प्रस्तावित बैठक को विपक्षी दलों के बीच आगे के कार्यक्रमों में समन्वय स्थापित करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
हाई-टी बैठक में किन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा?
बैठक में INDIA ब्लॉक के सांसदों के साथ विपक्षी अभियान से जुड़े मुद्दों पर विचार किए जाने की संभावना है। इसमें SIR प्रक्रिया पर आपत्तियां, मतदाता सूची में नाम हटाए जाने से जुड़ी शिकायतें और चुनाव आयोग की भूमिका जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, विपक्षी दल आगे आंदोलन जारी रखने, जनता तक अपना पक्ष पहुंचाने और विभिन्न संगठनों के साथ संवाद बढ़ाने पर भी चर्चा कर सकते हैं। हालांकि, बैठक में लिए जाने वाले अंतिम फैसलों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही विस्तृत कार्यक्रम स्पष्ट होगा।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा SIR और वोट चोरी का विवाद
विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर कानूनी रास्ता भी अपनाया है। 12 अक्टूबर के विरोध मार्च के दौरान विपक्षी नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से संबंधित मांगें उठाईं और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की कार्रवाई की। विपक्ष की मांगों में SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने, मतदाता सूची में बदलावों की समीक्षा और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का मुद्दा शामिल रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों की आशंकाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, ‘वोट चोरी’ विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों का हिस्सा है। इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय संबंधित पक्षों के दावों और न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में देखना जरूरी है।
CJI से मुलाकात का अनुरोध नहीं हुआ स्वीकार
विपक्षी नेताओं ने अपने प्रस्तावित मार्च से पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने का अनुरोध किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और मामले में निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया अपनाने का संकेत दिया। इसके बाद विपक्ष ने अपनी मांगों को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए। इस घटनाक्रम ने SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर जारी राजनीतिक बहस को और प्रमुखता दी है।
कई विपक्षी दलों के नेताओं की सक्रियता
हाल के दिनों में कांग्रेस समेत INDIA ब्लॉक के विभिन्न घटक दलों के नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर साझा रुख सामने रखा है। राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची की समीक्षा तथा चुनाव आयोग की जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाए हैं। विपक्षी गठबंधन के सामने अब अपने घटक दलों के बीच समन्वय बनाए रखने और आगे की रणनीति तय करने की चुनौती है। राहुल गांधी के आवास पर होने वाली बैठक में इस संबंध में चर्चा होने की उम्मीद है।
बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नजर
इस बैठक का एक अहम पहलू संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी हो सकता है। इसके जरिए विपक्षी दल अपने अगले कदमों और प्रमुख मांगों को सार्वजनिक रूप से सामने रख सकते हैं। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस के समय, उसमें शामिल होने वाले नेताओं और अंतिम कार्यक्रम की पुष्टि आधिकारिक जानकारी के आधार पर की जानी चाहिए। फिलहाल, SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और कथित वोट चोरी को लेकर जारी विवाद के बीच INDIA ब्लॉक की इस बैठक पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। बैठक से निकलने वाले फैसले यह स्पष्ट कर सकते हैं कि विपक्ष आने वाले दिनों में इस मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है।