सादिक अली, पचमढ़ी: नर्मदापुरम वन मंडल के रिहायशी इलाकों में पिछले दो-ढाई महीनों से दहशत का पर्याय बना सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का रेडियो-कॉलर लगा नर बाघ आखिरकार वन विभाग की गिरफ्त में है। तीन दिनों तक चले इस हाई-प्रोफाइल रेस्क्यू ऑपरेशन को बुधवार को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
अभियान की झलकियां
अवधि: 3 दिनों तक लगातार निगरानी और ट्रैकिंग।
टीम की ताकत: 5 शिकार हाथियों की मदद और कई फील्ड टीमों का समन्वय।
तकनीक का उपयोग: रेडियो-कॉलर सिग्नल के जरिए सटीक लोकेशन की ट्रैकिंग।
कैसे चला ऑपरेशन?
यह नर बाघ पिछले काफी समय से रिहायशी इलाकों के आसपास देखा जा रहा था, जिससे स्थानीय निवासियों में असुरक्षा का माहौल था। वन विभाग की टीमों ने तकनीकी दक्षता और धैर्य का परिचय देते हुए घेराबंदी की। पांच हाथियों की मदद से घने इलाकों में बाघ की लोकेशन को घेरा गया और बिना किसी चोट या अप्रिय घटना के उसे सुरक्षित रूप से बेहोश कर पकड़ लिया गया।
जंगल में छोड़ा जाएग बाघ
वन विभाग के अनुसार, बाघ का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। मेडिकल रिपोर्ट सामान्य आने के बाद उसे सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के सुरक्षित और उपयुक्त कोर क्षेत्र में छोड़ दिया जाएगा, ताकि वह अपने प्राकृतिक परिवेश में वापस लौट सके। यह ऑपरेशन हमारी टीम की पेशेवर दक्षता और तालमेल का परिणाम है। हम स्थानीय नागरिकों के धैर्य और सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त करते हैं।